*पापा, हेलमेट नहीं तो सफर नहीं…”: गुमला में ‘सीख से सुरक्षा’ अभियान बना भावनाओं की आवाज़, 398 बेटियो ने संभाली माता-पिता की सुरक्षा की जिम्मेदारी*
गुमला |
सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए गुमला जिला प्रशासन ने इस बार नियम और जुर्माने की परिधि से आगे बढ़ते हुए संवेदनाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने की अनूठी पहल की है। गुरुवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में आयोजित ‘सीख से सुरक्षा और तकनीक से परिवर्तन’ शिविर भावनाओं, संकल्प और जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बन गया। इस शिविर में विद्यालय की 398 छात्राओं को अपने माता-पिता और परिजनों की सड़क सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया।
‘मार्मिक पत्र’: जब कानून से ऊपर बोली भावना
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया, जब जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल ने छात्राओं को एक विशेष “होमवर्क” सौंपा। उन्होंने छात्राओं से अपने पिता और भाइयों के नाम ‘मार्मिक पत्र’ लिखने की अपील की।
उन्होंने कहा, “कई बार लोग पुलिस या चालान के डर से नियम मानते हैं, लेकिन घर की बेटी की भावुक अपील को कोई अनदेखा नहीं कर सकता।”
छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे अपने पत्रों में लिखेंगी—
“पापा/भैया, अगर आप मुझसे प्यार करते हैं, तो हेलमेट पहनकर ही निकलें। आपकी सुरक्षा में ही मेरी खुशी है।”
इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है।
विज्ञान और तकनीक से जुड़ी सुरक्षा की समझ
भावनात्मक पहल के साथ-साथ शिविर में सड़क सुरक्षा के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। छात्राओं को दुर्घटना के बाद के ‘स्वर्णिम एक घंटे’ (गोल्डन ऑवर) के महत्व, वर्ष 2025-26 में लागू हिट एंड रन मामलों में कैशलेस इलाज योजना, तथा पिलियन राइडर (पीछे बैठने वाले) के लिए हेलमेट की अनिवार्यता के वैज्ञानिक कारणों से अवगत कराया गया।
उपायुक्त का विजन: बेटियां बनेंगी सुरक्षा की प्रहरी
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का लक्ष्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो सुरक्षा को अपने जीवन-संस्कार का हिस्सा बनाए। जिला परिवहन पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से छात्राओं को यातायात नियमों, डिजिटल जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की जानकारी दी।
शपथ और संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की सभी 398 छात्राओं ने सामूहिक शपथ ली कि वे अपने परिवार और समाज के लोगों को संवाद एवं पत्रों के माध्यम से जागरूक करेंगी और गुमला को दुर्घटना-मुक्त जिला बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया कि जब प्रशासन की सोच, तकनीक की समझ और बेटियों की भावनाएं एक साथ जुड़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन निश्चित है।






