Jamshedpur जमशेदपुर में बीपीएल शुल्क प्रतिपूर्ति बंद होना: वंचित छात्रों के लिए एक बड़ा झटका

जमशेदपुर में बीपीएल शुल्क प्रतिपूर्ति बंद होना: वंचित छात्रों के लिए एक बड़ा झटक

एजेयूपीईआई (AJUPEI) के अध्यक्ष श्री नकुल कमानी, उपाध्यक्ष श्री गियान तनेजा, मानद सचिव डॉ. श्रीकांत नायर, मानद कोषाध्यक्ष श्री आर. के. झुनझुनवाला, श्री बी. चंद्रशेखर, सुश्री टीना बोधनवाला, श्री राजीव तलवार, श्री दिवाकर सिंह, श्री के. पी. जी. नायर एवं श्री शरद चंद्रन नायर ने प्रेस को शिक्षा विभाग से प्राप्त पत्र (पत्र संख्या 2698, दिनांक 17/11/2025) के संबंध में अवगत कराया।

इस पत्र में राज्य सरकार द्वारा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) छात्रों के लिए निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति से इनकार किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका कारण यह बताया गया है कि संबंधित विद्यालय टाटा स्टील से लीज पर प्राप्त सरकारी भूमि पर स्थित हैं, इसलिए उन्हें ‘सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय’ (Government Aided Schools) की श्रेणी में रखा गया है और इस आधार पर आगे किसी प्रकार की प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं हैं।

शिक्षा जगत से जुड़े संस्थान एवं अन्य हितधारक इस निर्णय की समीक्षा की मांग कर रहे हैं और इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि वंचित वर्ग के छात्रों को सहयोग दिया जाना आवश्यक है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऐसी योजनाओं पर निर्भर हैं।

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, जो 27 अगस्त 2009 को लागू हुआ तथा बाद में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया, का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। झारखंड सरकार ने 11 मई 2011 को प्रकाशित राजपत्र के माध्यम से RTE अधिनियम को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और यह भी स्पष्ट किया कि 3½ से 4 वर्ष की आयु के बच्चों को भी प्रवेश स्तर पर विचार में लिया जाएगा।

राज्य सरकार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्र (पत्र संख्या 1536, दिनांक 6 जुलाई 2011) के अनुसार बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान शुरू किया, जो प्रति छात्र ₹425 प्रति माह अर्थात ₹5100 प्रति वर्ष निर्धारित किया गया। RTE अधिनियम के तहत यह प्रावधान है कि विद्यालय को प्रति छात्र राज्य द्वारा किए गए वास्तविक व्यय (जो लगभग ₹3000 प्रति माह है) या विद्यालय द्वारा छात्र से ली गई वास्तविक फीस—इनमें से जो कम हो—उतनी राशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

इस प्रकार प्रति छात्र ₹425 प्रति माह की राशि, जबकि विद्यालय द्वारा प्रति छात्र लगभग ₹1500 प्रति माह का वास्तविक खर्च वहन किया जाता है, अत्यंत नगण्य है। इसके बावजूद जमशेदपुर के विद्यालयों ने वर्ष 2020 में इस राशि को ‘आपत्ति के साथ’ (Under Protest) स्वीकार करने पर सहमति दी थी।

हालाँकि, एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के तहत राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2020 से बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान बंद कर दिया। इसका उल्लेख निदेशक, राज्य शिक्षा विकास विभाग द्वारा जारी पत्र (पत्र संख्या 2061; दिनांक 14/12/2020) में किया गया है।

साथ ही झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के निदेशक श्री शैलेश कुमार चोरसिया द्वारा जारी पत्र (पत्र संख्या JEPC/RPE/47/10/2017–28/2061; दिनांक 14/12/2020) में जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को यह निर्देश दिया गया कि जिन विद्यालयों को झारखंड सरकार से भूमि या किसी भी प्रकार का अन्य लाभ प्राप्त हुआ है, उन्हें बीपीएल छात्रों की ट्यूशन फीस का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

इस निर्णय के कारण जमशेदपुर के कई निजी विद्यालय गंभीर वित्तीय संकट से जूझने लगे हैं और इसका सीधा असर वंचित वर्ग के छात्रों की शिक्षा पर पड़ने की आशंका है। जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहाँ यह समस्या सामने आई है।

शिक्षा विभाग को कई पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी विद्यालय को झारखंड सरकार से न तो भूमि प्राप्त हुई है और न ही किसी प्रकार की सहायता। कुछ विद्यालय टाटा स्टील से वार्षिक किराये पर ली गई भूमि पर संचालित हो रहे हैं।

इसके बावजूद, अब तक एसोसिएशन को कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। सभी उपलब्ध माध्यमों से समाधान का प्रयास करने के बाद अब एसोसिएशन इस विषय पर विचार कर रही है कि या तो आगे बीपीएल छात्रों का नामांकन न लिया जाए अथवा मामले को न्यायालय में ले जाकर समाधान प्राप्त किया जाए।

हमने सरकार से अपने पत्र दिनांक 22-04-2024 के माध्यम से यह जानकारी भी मांगी थी कि सरकारी विद्यालयों में कितनी सीटें उपलब्ध हैं, क्योंकि RTE अधिनियम के अनुसार जब सरकारी विद्यालयों की सभी सीटें भर जाती हैं, तब शेष छात्रों को निजी विद्यालयों में नामांकित किया जा सकता है। इस विषय पर भी सरकार की ओर से अब तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।

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