Hazaribag *हजारीबाग की सबसे सुरक्षित जेल से तीन कैदी फरार, 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाल

*हजारीबाग की सबसे सुरक्षित जेल से तीन कैदी फरार, 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खा*

 

*हजारीबाग,* झारखंड की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी कारा) से तीन कैदियों के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन और पुलिस की नींद उड़ा दी है। घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। प्रशासन ने फरार कैदियों की तलाश में व्यापक अभियान शुरू किया है।

 

*बैरक की खिड़की काटकर भागे कैदी*

 

जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन के अनुसार, फरार कैदियों के खिलाफ लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधीक्षक स्वयं इस मामले में सूचक हैं। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 224 के तहत दर्ज हुआ है। सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट हुआ है कि कैदियों ने बैरक नंबर 6 की खिड़की नंबर 4 का ग्रिल काटकर रात लगभग 1:36 से 2:45 बजे के बीच फरारी की। प्राथमिकी संख्या 196/2025 दर्ज की गई है।

 

*पुलिस ने बनाई एसआईटी, बिहार तक चल रही छापेमारी*

 

हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। पांच अलग-अलग टीमों को विभिन्न जिलों में छापेमारी के निर्देश दिए गए हैं। इनमें रांची, धनबाद और बिहार के संभावित इलाकों में पुलिस की टीमें सक्रिय हैं। फोरेंसिक टीम कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।

 

*लापरवाही पर दो हेड वार्डन निलंबित*

 

प्रारंभिक जांच में जेल प्रशासन ने दो हेड वार्डन — हरेंद्र महतो और उमेश सिंह — को निलंबित कर दिया है। इन दोनों की ड्यूटी उसी वार्ड में थी, जहां से कैदियों ने ग्रिल काटकर भागने की योजना को अंजाम दिया। जेल के 18 जवानों पर भी विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

अंधेरे और बिजली गुल होने का उठाया फायदा

जांच में सामने आया है कि कैदियों ने अंधेरे, घने कोहरे और रात में बिजली गुल होने का फायदा उठाया। घटना के बाद डीएसपी राजेंद्र कुमार ने जेपी कारा पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। हर पोस्ट पर चार जवान तैनात थे और दो-दो घंटे की ड्यूटी लगाई गई थी।

फरार कैदियों की पृष्ठभूमि

फरार कैदियों में सबसे कुख्यात देवा भुईया शामिल है, जिसका झारखंड के कई जिलों में आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी 2021 में धनबाद जेल से फरार हो चुका था। उसके खिलाफ दर्जनों गंभीर मामले लंबित हैं।

दूसरा कैदी जीतेंद्र रवानी पोक्सो एक्ट के तहत दोषी है और उसे 22 वर्ष की सजा हुई है। तीसरा फरार कैदी राहुल रजवार भी पोक्सो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।

पुलिस को बड़ी सफलता की उम्मीद

एसआईटी फरार कैदियों के नेटवर्क और मददगारों की तलाश में जुटी है। पुलिस देवा भुईया के पुराने ठिकानों पर विशेष नजर रख रही है। हजारीबाग एसपी ने दावा किया है कि जल्द ही इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की जाएगी।

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