*हौसले की मिसाल: आर्थिक तंगी के बावजूद रांची के अखलाक बने वर्ल्ड चैंपिय*
*रांची:*
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में 25 से 30 नवंबर तक आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में झारखंड के रांची स्थित कांके के रहने वाले अखलाक खान ने इतिहास रच दिया है।
दुनिया के 40 से अधिक देशों के बीच हुई इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में अखलाक ने डेड लिफ्ट में स्वर्ण पदक और फुल पावरलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर भारत और झारखंड का नाम गर्व से ऊँचा किया है।
संघर्ष और हौसले की कहानी:
अखलाक की ये जीत सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि जज़्बे और संघर्ष की मिसाल है।
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले अखलाक को इस चैंपियनशिप तक पहुँचने के लिए आर्थिक चुनौतियों से लड़ना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा, ट्रेनिंग और प्रतियोगिता शुल्क के लिए पैसे जुटाना उनके लिए लगभग असंभव हो गया था।
उन्होंने कई संस्थानों और सरकारी विभागों से मदद की अपील की, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी।
समाजसेवियों ने बढ़ाया हौसला:
जब हालात ने हार मानने को मजबूर किया, तभी कुछ समाजसेवियों और शुभचिंतकों ने अखलाक का हौसला बढ़ाया।
सबने मिलकर आर्थिक सहायता दी, और अखलाक को विश्व मंच तक पहुंचाया।
अखलाक ने भी इस भरोसे को अपनी मेहनत से जीत में बदल दिया — और आज वह पूरे झारखंड का गौरव बन चुके हैं।
अखलाक का कहना:
अपनी ऐतिहासिक जीत पर अखलाक खान ने कहा —
मैंने बार-बार खुद से कहा, ये सिर्फ मेरे लिए नहीं, झारखंड और भारत के लिए है।
जब लोगों ने मेरे लिए अपना विश्वास और मेहनत की कमाई लगाई, तो मेरा कर्तव्य था कि मैं उस भरोसे को जीत में बदल दूँ।”
उन्होंने आगे कहा —
अगर सही मार्गदर्शन और थोड़ा सहयोग मिले, तो झारखंड के खिलाड़ी दुनिया में अपनी पहचान बना सकते हैं।”
रांची में जश्न का माहौल:
अखलाक की जीत की खबर जैसे ही रांची पहुंची, खेल प्रेमियों और स्थानीय कोचों में खुशी की लहर दौड़ गई।
हर कोई इस जीत को झारखंड के खेल इतिहास का गौरवशाली पल बता रहा है।
कोचों का कहना है कि अखलाक की सफलता आने वाली युवा पीढ़ी को यह सिखाएगी कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, मेहनत और हौसला कभी हार नहीं मानते।
अखलाक खान की यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं,
बल्कि झारखंड की मेहनती और जुझारू खेल प्रतिभा का चमकता हुआ उदाहरण है।






