आदिवासी समाज के इतिहास को अगर आप देखें, तो पाएंगे कि 1770 में बाबा तिलका मांझी, उसके बाद वीर रघुनाथ सिंह के नेतृत्व में चुआड़ विद्रोह, फिर कोल्हान में वीर पोटो हो, उसके बाद वीर सिदो कान्हू, फिर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, वीर टाना भगत, वीर तेलंगा खड़िया… और ना जाने कितने ऐसे गुमनाम शहीद हैं, जिनके बिना भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा इनके योगदान को कम दिखाने का प्रयास किया, और इन्हें स्कूली किताबों में भी जगह नहीं मिली। हम लोग झारखंड आन्दोलन कर रहे थे, उस वक्त भी इसी कांग्रेस की सरकारें आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रही थीं, कई गोली कांड हुए, अनगिनत लोग शहीद हुए।
जब केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार बनी, तो उसने झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों के दर्द को, हमारे संघर्ष को सम्मान दिया, और झारखंड राज्य बना। यह अटल जी की सोच थी कि उन्होंने इस राज्य के गठन के लिए 15 नवंबर को चुना, एक ऐसी तारीख, जिस दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाई जाती है।
भाजपा ने हमेशा आदिवासियों के अधिकारों को सम्मान दिया। अटल जी की सरकार ने संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया। देश के करोड़ों आदिवासियों के कल्याण के लिए उन्होंने “जनजातीय कार्य मंत्रालय” बनाया, तथा कई अन्य योजनाएं शुरू की।
केन्द्र में जब एनडीए के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी जी की सरकार बनी तो कई राज्यों में आदिवासी समाज के लोग राज्यपाल बने। इसी सरकार ने देश में पहली आदिवासी राष्ट्रपति के तौर पर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को देख कर हमें गर्व होता है। यह उपलब्धि भी भाजपा की वजह से ही मिली।
मोदी सरकार ने 2021 से 15 नवंबर को, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जो जनजातीय गौरव दिवस के तौर पर मनाना शुरू किया। इस प्रकार हमारे महानायक को राष्ट्रीय पहचान मिली। इस दिन ना सिर्फ भगवान बिरसा मुंडा, बल्कि आदिवासी समाज के सभी क्रांतिकारियों को लोग याद करते हैं।
बात सिर्फ आदिवासी समाज के महानायकों को सम्मान देने की नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के उत्थान के लिए मोदी सरकार ने ऐतिहासिक काम किया है। पिछले एक दशक में जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए बजट आवंटन तीन गुना बढ़ गया है। साल 2014 से पहले देश में मात्र 123 एकलव्य विद्यालय थे, हो अब 715 हो चुके हैं। इनमें से 426 विद्यालय चल रहे हैं, बाकी निर्माणाधीन हैं। इन एकलव्य विद्यालयों में आज 1 लाख 32 हजार आदिवासी समाज के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
दो साल पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम जनमन योजना (जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान) की शुरुआत की है। इसके लिए लगभग 24,100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, जिसे बढ़ा कर 1 लाख 24 हजार करोड़ कर दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों एवं आदिम जनजातियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना है, जिससे उनका विकास हो सके।
इस समुदाय के लोगों की बुनियादी सुविधाओं (आवास, पानी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पोषण, सड़क और स्थायी आजीविका) को बेहतर कर, उनके जीवन स्तर में सुधार किया जा रहा है।
आगामी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अपनी अगली पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं तथा महानायकों पर गर्व करना सिखाइए, यही इन वीरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।




