डिमना डैम बना आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण केंद्र, एनडीआरएफ ने सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को सिखाए ‘जीवन रक्षक गुर’

डिमना डैम बना आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण केंद्र, एनडीआरएफ ने सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को सिखाए ‘जीवन रक्षक गुर’
जमशेदपुर: आपदा के समय कुछ मिनटों का साहस और सही प्रशिक्षण कई जिंदगियों को बचा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर 18 जून 2026 को सुबह 8 बजे जमशेदपुर के डिमना लेक डैम परिसर में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम द्वारा सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों को गोताखोरी, जल बचाव अभियान, आत्मरक्षा और आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की बारीकियों से अवगत कराया गया।

यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि आपदा की घड़ी में आम लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों को प्राथमिक सहायता देने और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखते हुए दूसरों की जान बचाने की व्यावहारिक सीख देने का एक व्यापक अभियान था। एनडीआरएफ के प्रशिक्षकों ने विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन कर स्वयंसेवकों को बताया कि प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं के दौरान किस प्रकार धैर्य, साहस और कौशल का समन्वय आवश्यक होता है।

कार्यक्रम की शुरुआत सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के साथ हुई। प्रशिक्षकों ने बताया कि बाढ़, डूबने की घटनाएं, नदी-तालाब में दुर्घटनाएं और अन्य आपात परिस्थितियां अचानक सामने आती हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन और बचाव एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी साबित होते हैं। इसी सोच के तहत सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को आधुनिक बचाव तकनीकों से लैस किया जा रहा है।

डिमना लेक के जल क्षेत्र में एनडीआरएफ टीम ने गोताखोरी के विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षकों ने बताया कि पानी में फंसे व्यक्ति तक पहुंचने, उसे सुरक्षित बाहर निकालने और घबराहट की स्थिति में उचित निर्णय लेने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाता है। स्वयंसेवकों को यह भी सिखाया गया कि बिना प्रशिक्षण के सीधे पानी में कूदना कई बार बचावकर्ता के लिए भी खतरा बन सकता है। प्रशिक्षण के दौरान लाइफ जैकेट, रस्सियों, फ्लोटिंग डिवाइस और अन्य बचाव उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार कम संसाधनों में भी प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सकता है। एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने व्यावहारिक अभ्यास कराकर स्वयंसेवकों का आत्मविश्वास बढ़ाया।

एनडीआरएफ अधिकारियों ने प्रशिक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण संदेश दिया कि किसी भी आपदा में बचावकर्ता की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। यदि स्वयंसेवक ही असुरक्षित हो जाए तो राहत कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण आत्मरक्षा के विभिन्न उपायों और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई।स्वयंसेवकों को बताया गया कि बाढ़, आग, भवन ढहने, सड़क दुर्घटना और अन्य आपदाओं के दौरान किस प्रकार जोखिम का आकलन किया जाए और उसके बाद राहत कार्य शुरू किया जाए। प्रशिक्षण में मानसिक संतुलन बनाए रखने, घबराहट से बचने और टीम भावना के साथ कार्य करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान कई व्यावहारिक अभ्यास और मॉक ड्रिल भी कराई गईं। इनमें काल्पनिक आपदा परिस्थितियां तैयार कर स्वयंसेवकों को राहत एवं बचाव कार्य करने का अवसर दिया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने सीखी गई तकनीकों का प्रदर्शन किया और प्रशिक्षकों से आवश्यक सुझाव प्राप्त किए। एनडीआरएफ टीम ने बताया कि वास्तविक आपदा के समय केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता। बार-बार अभ्यास और प्रशिक्षण ही किसी व्यक्ति को प्रभावी बचावकर्ता बनाता है। यही कारण है कि प्रशिक्षण में व्यावहारिक गतिविधियों को विशेष महत्व दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और आकस्मिक घटनाओं को देखते हुए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। प्रशासनिक मशीनरी के साथ मिलकर ये स्वयंसेवक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जनजागरूकता फैलाने का कार्य करते हैं। डिमना डैम में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और एनडीआरएफ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक उपलब्ध होते हैं तो राहत एवं बचाव कार्य अधिक तेज, प्रभावी और सफल बन जाते हैं। एनडीआरएफ द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने स्वयंसेवकों को न केवल तकनीकी जानकारी दी, बल्कि उनमें सेवा, समर्पण और मानवता की भावना को भी मजबूत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में अपनी भूमिका को जिम्मेदारीपूर्वक निभाने का संकल्प लिया।

डिमना लेक डैम में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक अभ्यास सत्र नहीं था, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जागरूक और सक्षम नागरिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। एनडीआरएफ के विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और कौशल प्रदान किया।

आने वाले समय में यदि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक या मानवजनित आपदा सामने आती है तो यही प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्यों की पहली पंक्ति में खड़े नजर आएंगे। दिमना डैम से निकला यह संदेश स्पष्ट है कि सतर्कता, प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास ही आपदा के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार हैं।

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