सरायकेला: भाजपा ने झामुमो
प्रवक्ता कुणाल षाडंगी के बयान को बताया शर्मनाक, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के अपमान पर उठाए सवाल
आदित्यपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी सरायकेला-खरसावां के जिला अध्यक्ष उदय सिंहदेव एवं विधायक प्रतिनिधि सानंद आचार्य ने झामुमो प्रवक्ता कुणाल षाडंगी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि झामुमो के प्रवक्ता द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर की गई अभद्र टिप्पणी उनके घटिया मानसिकता का परिचायक है. उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड आंदोलन के दो शीर्ष नेताओं के रिश्तों पर सर्टिफिकेट देने का अधिकार उन्हें किसने दिया,भाजपा नेताओं ने कहा कि चंपाई सोरेन ने अपना पूरा जीवन झारखंड आंदोलन और झामुमो के संगठन निर्माण में समर्पित कर दिया. उन्होंने इसी मानसिकता के विरोध में पार्टी से इस्तीफा दिया था, जिसकी वजह अब स्पष्ट हो चुकी है. भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन से पूछा कि क्या वरिष्ठ नेताओं का अपमान अब झामुमो की नीति बन गई है.उन्होंने कहा कि जिन चंपाई सोरेन ने विषम परिस्थितियों में पार्टी और सरकार को टूटने से बचाया, जिनकी योजनाओं से झामुमो को सत्ता में वापसी मिली, आज उन्हीं का अपमान किया जा रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि चंपाई सोरेन एक ऐसे नेता हैं, जिनकी चार दशक की सार्वजनिक सेवा पर कभी कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. ऐसे व्यक्तित्व पर सवाल उठाने का अधिकार किसी के पास नहीं है.भाजपा नेताओं ने झामुमो प्रवक्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि वे “हर चुनाव से पहले पार्टी बदलने वाले” लोगों में से हैं, जिनकी कोई विचारधारा नहीं होती. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी के निजी जीवन पर टिप्पणी करना अस्वीकार्य है और जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी.
उन्होंने प्रवक्ता द्वारा वोटर लिस्ट और आधार कार्ड के संदर्भमें दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि क्या झामुमो के उन नेताओं की सूची जारी की करेगी जो अपने क्षेत्र से बाहर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की पार्टी एसआईआर का विरोध करती है, उन्हें आधारकार्ड पर भाषण देना शोभा नहीं देता.
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि चाकुलिया में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, जिस पर प्रशासन ने भी पुष्टि की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि झामुमो सरकार आदिवासियों के हितैषी होने का दावा करती है, जबकि नगड़ी में आदिवासी किसानों की जमीन छीनने और बाड़बंदी का कार्य उसी सरकार में हुआ.
नेताओं ने कहा कि झारखंड की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है. घाटशिला, पाकुड़ और कोल्हान के अन्य इलाकों में भूमिपुत्रों की जमीनें छीनी जा रही हैं, जबकि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार एसआईआर जैसी पहल के जरिए स्थिति सुधारने का प्रयास करती है, तो झामुमो वोट बैंक की राजनीति के लिए उसका विरोध करती है. उन्होंने कहा कि जो लोग जल, जंगल और जमीन की बात करते हैं, वे ही आज अपनी मातृभूमि और आदिवासियों को धोखा दे रहे हैं.






