राँची। झारखण्ड में कोचिंग संस्थानों की मनमानी से विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं।
कोर्स कराने के बदले एडवांस में पैसे लेकर संचालकों का भाग जाना आम बात हो गई है। पूर्व में बताए गए फैकल्टी की जगह दूसरे टीचर से क्लास कराने से भी छात्र परेशान रहते हैं।
हद तो तब हो जाती है जब रिजल्ट निकलने पर तमाम कोचिंग संस्थान के होर्डिंग में एक ही छात्र की तस्वीर दिखती है। अब ऐसा नहीं चलेगा। इसके दायरे में वैसे सभी संस्थान आएंगे जो भौतिक, ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड पर 50 से ज्यादा छात्रों को कोचिंग देते हैं।
विद्यार्थियों के साथ-साथ कोचिंग सेंटर में सेवारत टीचर और कर्मियों के हित को ध्यान में रखते हुए हेमंत सरकार ने झारखण्ड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2025 को विधानसभा से पारित कराया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से यह कानून झारखण्ड में लागू हो जाएगा।






