जमशेदपुर में भारी बारिश, कई ट्रेनें प्रभावित, रेल महाप्रबंधक भी वापस लौटे

जमशेदपुर में भारी बारिश, कई ट्रेनें प्रभावित, रेल महाप्रबंधक भी वापस लौटे
जमशेदपुर : पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण जमशेदपुर शहर का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कों पर तो पानी भरा हुआ है, रेल ट्रैक भी इससे अछूती नहीं है। बारिश के रेलवे ने 27 ट्रेनों को रद किया है जबकि लंबी दूरी वाली पांच ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है।
झारखंड का पश्चिमी (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां व सिमडेगा) क्षेत्र पिछले तीन दिनों से रेड अर्ल्ट पर है जिसके कारण भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 348 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में रेलवे ट्रैक में ड्रेनेज की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के ट्रैक पर दो से तीन फीट तक पानी जमा हो गया है। सूचना मिलने पर चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया खुद टाटानगर पहुंचे और वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की। सुबह साढ़े 10 बजे से जेसीबी की मदद से पानी की निकासी के लिए ट्रैक के बगल में बनाए गए सीमेंट के रास्तों को काटा गया जिसके बाद धीरे-धीरे पानी की निकासी शुरू हुई। हालांकि स्थिति अब भी सामान्य बनी हुई है और बारिश होने के कारण जल-जमाव की स्थिति बनी हुई है।
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अंडर पास बनने के बाद बदल गए हैं हालात
टाटानगर रेलवे स्टेशन में लोको को आपस में जोड़ने के लिए लगभग 500 मीटर का बड़ा अंडर पास बनाया गया है लेकिन इस अंडर पास के बनने के बाद से जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे ऊपरी क्षेत्र से नाले के माध्यम से आने वाला पानी या निचले क्षेत्र में आने वाले पानी की निकासी का कोई उपाय नहीं किए गए हैं इसके कारण पहली बारिश में ही जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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रेल महाप्रबंधक का कार्यक्रम भी टला
दक्षिण पूर्व रेलवे के रेल महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा एक दिवसीय दौरे पर गुरुवार को खड़गपुर से टाटानगर होते हुए झारसुगुड़ा जाने वाले थे लेकिन भारी बारिश के कारण ट्रैक पर जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में वे चक्रधरपुर से वापस टाटानगर लौट आए। टाटानगर पहुंचने के बाद उन्होंने ट्रैक पर जल-जमाव की स्थिति को देखते हुए डीआरएम सहित इंजीनियरिंग विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और वापस कोलकाता लौट गए।
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कोट =
टाटानगर में पिछले तीन दिनों से भारी बारिश के कारण जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। पानी की निकासी वाली सारी नालियां भी भर गई थी। पानी निकलने के बाद से गाड़ियों की स्पीड कम कर चलाई जा रही है। दो-तीन घंटे में पूरा पानी निकाल दिया जाएगा।

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