*भारत में ई व्हीकल इंडस्ट्री में तेज़ी: 5 महत्वपूर्ण बातें, जो आपको जाननी चाहिए*
रांची, भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह इंडस्ट्री ऑटोमोबाइल सेक्टर को नया आकार देगी। प्रदूषण नियंत्रण, ईंधन की बढ़ती कीमतें और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएँ इस बदलाव को गति दे रही हैं। आइए जानते हैं इस इंडस्ट्री से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण बातें:
1. ईवी इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ
भारत में ईवी पैसेंजर व्हीकल की हिस्सेदारी 2016 में सिर्फ 0.03% थी, जो 2023 में 1.3% और 2024 में 2% तक पहुँच गई। अनुमान है कि 2025 तक यह 4% और 2030 तक एक-तिहाई पैसेंजर व्हीकल का हिस्सा बन सकती है। 150% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) इस क्षेत्र की तेज़ी को दर्शाती है।
2. जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया की धमाकेदार ग्रोथ
ईवी मार्केट में जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। 2024 में कंपनी की बिक्री 98% बढ़कर 29,035 यूनिट्स हो गई, जिससे इसका ईवी मार्केट शेयर 26% तक पहुँच गया। वहीं, टीपीईएम (टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) 61% मार्केट शेयर के साथ अग्रणी बनी हुई है, लेकिन एमजी मोटर जैसी कंपनियाँ तेजी से उभर रही हैं।
3. भारत का ईवी मार्केट सालाना 11% की दर से बढ़ रहा
भारत में इलेक्ट्रिक कार बाजार 2024 में 11% बढ़ा है और यह गति आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। सरकार द्वारा फेम (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) जैसी योजनाओं से इस इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिल रहा है। बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भरता आने से लागत घटेगी और ईवी अपनाने में तेजी आएगी।
4. ईवी खरीदने पर कई राज्यों में आरटीओ शुल्क नहीं
ई व्हीकल्स की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए कई राज्यों ने आरटीओ शुल्क हटा दिए हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़, उत्तराखंड, गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में आरटीओ शुल्क 0% कर दिया गया है। वहीं, गुजरात (6%), हरियाणा (2.5%), केरल (5%), मध्य प्रदेश (4%) और पश्चिम बंगाल (25,000 रुपए) जैसे राज्यों में अभी-भी शुल्क लागू है।
5. 2028 तक 50 से अधिक नए ईवी मॉडल्स और 9 लाख यूनिट्स की बिक्री का अनुमान
विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 तक 50 से अधिक नए ईवी मॉडल्स बाजार में आएँगे, जिससे वार्षिक बिक्री 9 लाख से अधिक यूनिट्स तक पहुँच सकती है। यह न केवल भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बदल देगा, बल्कि देश को हरित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर भी ले जाएगा।
भारत में ई व्हीकल इंडस्ट्री न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है, बल्कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को भी ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बना रही है। सरकार की नीतियों, नई टेक्नोलॉजी और उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि के चलते यह बाजार आने वाले वर्षों में और भी अधिक तेज़ी से बढ़ेगा।






