उदयनिधि के बयान इतना विवाद क्यों?

उदयनिधि के बयान का विरोध करते बीजेपी के कार्यकर्ता.

उदयनिधि के बयान को लेकर देशव्यापी स्तर पर विरोध देखने को मिल रहा है, ऐसा क्यो हैं, यह पूछे जाने पर विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके) के सांसद डी रविकुमार कहते हैं, “क्योंकि लोगों की बीजेपी से शिकायतें बढ़ रही हैं, उनकी सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता के आरोप लग रहे हैं, इसलिए यह सारा विरोध लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है.”

“शुरुआत में तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इंडिया अलायंस इस तरह एकजुट रहेगा. उन्हें लगा कि ऐसा नहीं होगा. लेकिन गठबंधन बना और लगातार आगे बढ़ रहा है और यह उनके लिए बड़ा ख़तरा है. लिहाजा लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने इस मुद्दे को अपने हाथ में लिया है.”

जब उत्तर भारत में हर कोई उदयनिधि के बयान का विरोध कर रहा है तब डी रविकुमार कहते हैं, ”सनातन का अर्थ क्या है और इसका अर्थ क्या है, इस पर बहस उत्तर भारत में भी होने दीजिए.”

रविकुमार का यह भी मानना है कि इससे वोट बैंक की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “उन्होंने कर्नाटक राज्य को हिंदुत्व की प्रयोगशाला के रूप में आजमाया. लेकिन वे अगले चुनाव में ही हार गए. जब क़ीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं तो इस बात को बहस का रूप देने से कोई फ़ायदा नहीं होगा. इससे चुनाव में विपक्षी दलों को कोई नुक़सान नहीं होगा.”

वैसे चुनाव नज़दीक होने के चलते भी यह तो स्वाभाविक है कि विपक्षी इंडिया गठबंधन को इससे संबंधित सवालों का सामना करना होगा. जहाँ तक कांग्रेस की बात है तो तमिलनाडु कांग्रेस के नेता उदयनिधि स्टालिन के विचारों का समर्थन करते हैं.

सांसद कार्तिक चिदंबरम ने कहा, “सनातन धर्म तमिलनाडु में एक जाति संरचना है. इसके अलावा, इसका कोई अन्य दार्शनिक अर्थ नहीं है. उदयनिधि ने जो कहा, उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. उन्होंने किसी जातीय समूह के विनाश का आह्वान नहीं किया.”

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