तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन.
तमिलनाडु की दलित राजनीतिक पार्टी, विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके) के मौजूदा अध्यक्ष तोल थिरुमावलवन लगातार सनातन विरोध की बात करते रहे हैं.
उन्होंने सनातन के ख़िलाफ़ कई बड़े सम्मेलन आयोजित किए हैं. 2018 में पेरियार के स्मृति दिवस पर, थिरुमावलवन ने कहा था, “सामाजिक न्याय की जीत होगी और हम उस दिन सनातन को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे”.
उसके बाद, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले, थिरुमावलवन ने जनवरी में त्रिची में देसम कप्पोम नामक एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया और कहा, “सनातन ख़त्म होने पर ही भाईचारा कायम रहेगा. सनातनी ताक़तों द्वारा इस देश को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना हमारा कर्तव्य है.”
“सनातन सिद्धांत और लोकतांत्रिक सिद्धांत के बीच दो हज़ार साल पुराना संघर्ष है. वे वर्षों पहले मौजूद सनातन सिद्धांत को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर सनातन सत्ता में वापस आते हैं, तो वर्णाश्रम और जातिगत भेदभाव फिर से अपना सिर उठाएगा.”
इसी सम्मेलन में उस समय विपक्ष में रहे डीएमके के नेता एमके स्टालिन ने भी भाग लिया और भाषण दिया.
थिरुमावलवन ने 2021 विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में नारा दिया था, “आओ सनातन को जड़ से उखाड़ें, चलो लोकतंत्र की रक्षा करें.” कई अन्य अवसरों पर उन्होंने पार्टी स्वयंसेवकों से वादा किया है कि वे स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सनातन को उखाड़ फेंकेंगे.
पिछले साल भी विड़ूदलाई चिरुतैगल कच्ची (वीसीके), डीएमके और कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी. उस वक्त बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस गठबंधन की एक पार्टी सनातन धर्म के विरोध की बात कर रही है. लेकिन थिरुमावलवन के भाषणों पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली थी.





