अजित पवार ने 2 जुलाई को अपने चाचा शरद पवार के साथ बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे. पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी. जबकि उनके साथ 8 और विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी. अजित पवार ने दावा किया था कि उनके पास 40 विधायकों का समर्थन है. इस मामले में दोनों पार्टियों ने चुनाव आयोग का भी रुख किया है. सुप्रिया सुले का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है. क्योंकि ये बयान ऐसे वक्त पर आया, जब एनसीपी चीफ शरद पवार भतीजे अजित पवार की बगावत के बाद पार्टी को फिर से खड़ा करने की चुनौती से जूझ रहे हैं. हालांकि, बगावत के बाद अजित पवार चार बार अपने चाचा शरद पवार से मुलाकात कर चुके हैं. हर बार शरद पवार ने इसे पारिवारिक बैठक बताया है.






