सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर उमड़ा भक्तों का जन-सैलाब, प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है – आलोक कृष्ण शास्त्री

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर उमड़ा भक्तों का जन-सैलाब, प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है – आलोक कृष्ण शास्त्री।

 

 

जामसेदपुर /पोटका

 

 

प्रखंड अंतर्गत जामदा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ गुरुवार को विश्राम दिवस के साथ संपन्न हो गया। अंतिम दिन कथा स्थल पर भक्तों का जन-सैलाब उमड़ पड़ा। शाम होते ही दूर-दराज से श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचने लगे थे।

 

सात दिनों तक कथावाचक आलोक कृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से भक्तों ने चारों वेद, पुराण, गीता एवं श्रीमद् भागवत महापुराण की सरल और मार्मिक व्याख्या का श्रवण किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम तथा कालिया दमन, गोवर्धन लीला, रासलीला जैसी विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि आज समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता और व्यभिचार को दूर करने के लिए युवाओं को आगे आना होगा।

 

विश्राम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, कंस वध, कुब्जा उद्धार, रुक्मिणी विवाह, शिशुपाल वध, स्यमंतक मणि कथा, 16108 रानियों का उद्धार, कृष्ण-सुदामा मिलन, परीक्षित मोक्ष, भागवत के 12 स्कंधों का सार तथा कलियुग में भागवत की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। भजन गायन के दौरान श्रद्धालु ताल और धुन पर झूम उठे।

 

कथावाचक ने गीता के उपदेशों का हवाला देते हुए कहा कि सुंदर समाज का निर्माण हिंसा से नहीं, प्रेम, क्षमा और सदाचार से होगा। जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से कभी संभव नहीं हो सकता।

 

कथा विश्राम के उपरांत महाआरती हुई और भक्तों के बीच फल-प्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में गांव के सभी ग्रामीणों, युवाओं और आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा।

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