झारखंड शिक्षा विभाग का कारनामा, स्कूल भवन का पता नहीं और डुमरिया में ₹2.67 करोड़ से बन रहा छात्रावास

11 साल से अधूरा मॉडल स्कूल भवन खंडहर में बदल रहा

बिना भवन और शिक्षकों के छात्रावास पर उठे गंभीर सवाल

रांची : झारखंड के शिक्षा विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। डुमरिया प्रखंड के कांटाशोल पंचायत स्थित बारेडीह गांव में झारखंड शिक्षा परियोजना के तहत 2.67 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल स्कूल के लिए भव्य छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन जिस विद्यालय के छात्रों के लिए यह छात्रावास बन रहा है, उसका अपना भवन ही नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चे छात्रावास में रहकर पढ़ाई आखिर कहां करेंगे?
वर्तमान में डुमरिया मॉडल स्कूल का संचालन करीब छह किलोमीटर दूर भालुकपातड़ा प्लस टू उच्च विद्यालय के मात्र चार कमरों में किया जा रहा है। सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहां 239 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
विद्यालय भवन आज भी पड़ा है अधूरा
विडंबना यह है कि बारेडीह में मॉडल स्कूल भवन का निर्माण करीब 11 वर्ष पहले राज्य सरकार के अंशदान पर केंद्र सरकार द्वारा 2.98 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया था, लेकिन योजना बीच में ही बंद हो गई।
परिणामस्वरूप विद्यालय भवन आज भी अधूरा पड़ा है और धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है। अब शिक्षा विभाग उसी अधूरे विद्यालय भवन को पूरा कराने के बजाय पहले छात्रावास खड़ा कर रहा है।
अभिभावकों में भारी नाराजगी
इससे अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब विद्यालय भवन ही नहीं है तो छात्रावास का क्या औचित्य? क्या बच्चे छात्रावास से प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर दूसरे विद्यालय जाकर पढ़ाई करेंगे? विभाग की यह योजना पूरी तरह अव्यावहारिक और संसाधनों की बर्बादी प्रतीत होती है।

Leave a Comment