पोटका में मिर्गी मरीजों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, 84 मरीजों की जांच कर बांटी गई दवाइयां

पोटका में मिर्गी मरीजों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, 84 मरीजों की जांच कर बांटी गई दवाइयां
पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में मिर्गी मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए झारखंड सरकार की पहल पर एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। मिर्गी रोगियों को बेहतर इलाज और परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिवसीय विशेष कैंप लगाया गया। इस शिविर का नेतृत्व दिल्ली एम्स की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ ममता भूषण सिंह ने किया।
शिविर में कुल 84 मिर्गी मरीजों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी के लक्षण, कारण और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। शिविर में पहुंचे मरीजों को नियमित दवा सेवन और समय-समय पर जांच कराने की सलाह दी गई।
इस अवसर पर डॉ ममता भूषण सिंह ने बताया कि झारखंड में मिर्गी रोगियों के लिए विशेषज्ञ स्तर पर इलाज की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी कारण राज्य सरकार के आग्रह पर दिल्ली एम्स की टीम यहां पहुंची है, ताकि मरीजों की पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जो केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पाई जाती है। कई मामलों में यह बीमारी वंशानुगत भी होती है और पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है।
डॉ सिंह ने बताया कि जन्म के समय यदि बच्चे के रोने या आवाज निकलने में देरी होती है, तो यह भी भविष्य में मिर्गी के लक्षणों का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते पहचान और दवा के सही डोज से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मिर्गी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि नियमित इलाज और जागरूकता से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूर्वी सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में मिर्गी मरीजों की संख्या चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक चाकुलिया में 226, पटमदा में 234, गोलमुरी-सह-जुगसलाई में 117, घाटशिला में 106, बहड़ागोड़ा में 104, धालभूमगढ़ में 100, पोटका में 144 और डुमरिया में 44 मरीजों की पहचान की गई है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य प्रखंडों में भी इस तरह के विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को समय पर इलाज और राहत मिल सके। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

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