जब आप किसी अस्पताल में जाते हैं तो इस विश्वास के साथ जाते हैं कि आपके मरीज का वहां सही ढंग से ईलाज होगा एवं उनके जीवन की रक्षा हो सकेगी।
लेकिन अगर अस्पताल कागजी खानापूर्ति में समय बर्बाद करने लगे, और इस वजह से किसी की जान चली जाए, तो यह अक्षम्य अपराध है।
आज जब मैं स्व. संतोष सिंह जी के निधन की सूचना पर टाटा मेन हॉस्पिटल पहुँचा, तो उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कागजी प्रक्रिया के नाम पर समय बर्बाद करने तथा इमरजेंसी में किसी अनुभवी चिकित्सक के उपलब्ध ना रहने का आरोप लगाया।
इसका मतलब यह है कि अगर समय पर समुचित चिकित्सा मिलती, तो शायद संतोष जी को बचाया जा सकता था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी घटनाएं अस्पतालों एवं चिकित्सकों के प्रति आम लोगों के विश्वास को तोड़ कर रख देती हैं।
अस्पतालों के लिए मानव जीवन की रक्षा ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इस संबंध में अधिकारियों से बात हुई तथा उन्हें सिस्टम को ठीक करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों।






