झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने पेसा कानून और सारेंगसिया शहीद स्थल कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर जोरदार हमला बोला है।

पेसा कानून और शहीद कार्यक्रम पर सियासत गरम

चाईबासा से बड़ी खबर,
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने पेसा कानून और सारेंगसिया शहीद स्थल कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर जोरदार हमला बोला है।

मंगलवार को 1993 विस्फोट कांड में न्यायालय में पेशी के बाद चंपई सोरेन चाईबासा परिसदन सभागार पहुंचे, जहां उन्होंने सारेंगसिया शहीद स्थल से जुड़े आयोजकों के साथ बैठक की। इसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों के आदिवासी लंबे समय से 1996 के मूल पेसा कानून के अनुसार व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे थे, लेकिन वर्तमान में लागू कानून उसकी मूल भावना को कमजोर करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा कानून लागू तो हुआ, लेकिन वर्तमान स्वरूप में यह आदिवासियों के साथ धोखा है। मुंडा, मानकी, डाकुआ और दिवरी जैसी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्राम सभा के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं, जिससे आदिवासी स्वशासन प्रभावित हो रहा है।

सारेंगसिया घाटी में हर साल होने वाले शहीद श्रद्धांजलि कार्यक्रम पर रोक को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई।

आयोजन समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह लागुरी ने कहा कि हर साल यह कार्यक्रम होता आया है, इसे रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है और कार्यक्रम हर हाल में होगा।

सड़क और नो-एंट्री मुद्दे पर चंपई सोरेन ने कहा कि सरकार समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी अधिकारों और परंपराओं की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।

संबोधन: चंपई सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला विधायक

महेंद्र सिंह लागुरी, अध्यक्ष श्रद्धांजलि आयोजन कमेटी

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