वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ बिना श्राद्ध भोज के संपन्न हुआ राम प्रताप जी का श्राद्ध कर्
श्राद्ध से विदेही आत्मा को कोई फायदा नहीं होता
श्राद्ध करने वाले के मानसिक संतुष्टि के लिए किया जाता है श्राद्ध
जमशेदपुर;
स्वर्गीय आनंदमार्गी रामप्रताप जी का निधन जमशेदपुर टेल्को अस्पताल में ह्रदय गति रूक जाने के कारण हुआ था । जमशेदपुर गदरा में जमींन दान देने वाले यही व्यक्ति थे जिनके जमीन पर गदरा में आनंद मार्ग जागृति बना है ।आज 4 जनवरी को आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गदरा स्वर्गीय रामप्रताप जी का श्राद्धनुष्ठान का कार्यक्रम आचार्य ब्रजगोपालानंद अवधूत ने संपन्न करवाया सबसे पहले ईश्वरप्रणीधान के बाद श्राद्ध का मंत्र आचार्य ब्रजगोपालानंद अवधूत के द्वारा उच्चारित किया गया उसके बाद उपस्थित लोगों ने भी मंत्र का उच्चारण किया मंत्र – “ॐ मधु वाता ऋतायते मधुं क्षरन्तु सिन्धवः ।
माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः
मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवं रजः ।
मधु द्यौरस्तु नः पिता ।।
मधुमान्नो वनस्पति र्मधुमान् अस्तु सूर्यः ।
माध्वीर्गावो भवन्तु नः ॥
ॐ मधु ॐ मधु ॐ मधु ” हे परमेश्वर हम लोगों के परम आत्मीय रामप्रताप जी की विदेही आत्मा आज मरणसील जगत के ऊपर जगत के सुख -दुख से बाहर है |हे परमेश्वर उनकी अमर आत्मा उत्तरोत्तर प्रसार लाभ करें | आचार्य ब्रजगोपालानंद अवधूत एवं सुनील आनंद ने कहा कि श्राद्ध से विदेही आत्मा का कोई फायदा नहीं होता श्राद्धकर्ता की मानसिक शांति के लिए होता है । शोक के समय में अपने को व्यर्थ कष्ट देना या लोगों को दिखाने के उद्देश्य से बेवजह कोई काम नहीं करना चाहिए शोक का समय 12 दिन से अधिक नहीं होना चाहिए 12 दिन के भीतर ही किसी भी दिन सुविधानुसार श्राद्धकर्म संपन्न कर सकते हैं अंत में ” सर्वेत्र भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
न कश्चिद् दुःख माप्नुयात्
ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः” कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुपुत्र दिवाकर देव भक्ति प्रधान सुधीर आनंद, योगेश जी,अरुण वर्मा शिव कुमार सिंह तथा अन्य लोगों ने भी इस श्राद्ध कार्यक्रम में भाग लिए।





