हैदराबाद: पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में दो महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है. इन सुधारों का उद्देश्य NPS को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और ग्राहक हितैषी बनाना है. इनमें से एक बदलाव पेंशन फंडों पर लागू शुल्क में कमी से जुड़ा है, जबकि दूसरा बदलाव बैंकों को स्वतंत्र पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति से संबंधित है.
बैंकों को मिलेगा पेंशन फंड स्थापित करने का अधिकार
PFRDA ने अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) को NPS परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने के लिए स्वतंत्र पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति दी है. इसका मतलब है कि अब निवेशकों के पास NPS फंड चुनने के और भी विकल्प होंगे.
हालांकि, केवल वित्तीय और पूंजी की दृष्टि से मजबूत बैंकों को ही यह अनुमति दी जाएगी. योग्यता के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मानदंडों के आधार पर निवल संपत्ति, मार्केट कैपिटलाइजेशन और अन्य मापदंडों को देखा जाएगा. पात्रता संबंधी विस्तृत गाइडलाइन जल्द ही जारी की जाएगी.
PFRDA के अनुसार, इस पहल से पेंशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और वित्तीय निगरानी मजबूत होगी.
NPS शुल्क में बड़ा बदलाव
दूसरा अहम बदलाव निवेश प्रबंधन शुल्क (Investment Management Fee – IMF) में संशोधन है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए पेंशन लागत को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है.
सरकारी और गैर-सरकारी ग्राहकों के लिए स्लैब-आधारित शुल्क संरचना लागू की जाएगी. सरकारी क्षेत्र की दरें यथावत रहेंगी, जबकि गैर-सरकारी क्षेत्र में कैटेगरी के आधार पर शुल्क तय होगा.







