कलींगा यूनिवर्सिटी, रायपुर के दीक्षांत समारोह में रांची के ग़्राम क़ंदरी निवासी डॉ. अमर नाथ पाठक को पीएचडी की उपाधि।

कलींगा यूनिवर्सिटी, रायपुर के दीक्षांत समारोह में रांची के ग़्राम क़ंदरी निवासी डॉ. अमर नाथ पाठक को पीएचडी की उपाधि।

कालींगा यूनिवर्सिटी, रायपुर ने 12 नवंबर 2025 को अपना दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें कई विद्वानों के साथ डॉ. अमर नाथ पाठक को भी औपचारिक रूप से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। डॉ. अमर मूल रूप से गांव कंदरी के निवासी हैं।

डॉ. अमर को पीएचडी की उपाधि छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा प्रदान की गई। समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा, भारत सरकार के आवास और शहरी विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, तथा प्राइवेट यूनिवर्सिटी रेगुलेटरी बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विजय गोयल भी उपस्थित थे। इन विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने समारोह को और गरिमामय बनाया।

श्रीमती प्रेमलता पाठक और स्वर्गीय श्री भृगु राम पाठक के पुत्र, डॉ. अमर पाठक की प्रारंभिक शिक्षा रांची जिले के मांडर प्रखंड स्थित गांव कंदरी के प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई। आगे की पढ़ाई उन्होंने मिडिल स्कूल मांडर में कक्षा 8 तक की और उसके बाद सेंट ज़ेवियर्स हाई स्कूल मिशन मांडर में जारी रखी। डॉ. अमर सूचना तकनीक में स्नातक , एमबीए, पीजीडीएएम, पीजीसीएचआरएम हैं और XLRI जमशेदपुर के गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं।*गांव के एक छोटे से स्कूल से राष्ट्रीय पहचान तक उनकी यह यात्रा उनकी लगन और मेहनत का स्पष्ट प्रमाण है।

आज डॉ. अमर देश के जाने-माने मानव संसाधन विशेषज्ञ और मानव संसाधन तथा Aartificial Intelligence के क्षेत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। वे कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं और देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के सलाहकार मंडल में शामिल हैं। वर्तमान में वे अहमदाबाद में स्थित एक बड़े कॉर्पोरेट समूह में डीजीएम और हेड ऑफ टैलेंट मैनेजमेंट के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. अमर ने अपने पीएचडी गाइड के प्रति सतत मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने मित्रों और सहकर्मियों के प्रोत्साहन को भी सराहा। साथ ही, उन्होंने पत्नी अनुपमा और पुत्री अन्वी का विशेष धन्यवाद किया जिनके समर्थन ने कठिन समय में उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दी। इस उपाधी को डॉ. अमर ने अपने माता श्रीमती प्रेपलता पाठक और दिवंगत पिता श्री भृगु राम पाठक को समर्पित किया है।

यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। डॉ. पाठक अब नए उत्साह और उद्देश्य के साथ अपने शोध और अनुभव को समाज और उद्योग में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार हैं।

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