विहंगम योग टाटा संत समाज द्वारा निकाली गई – “स्वर्वेद यात्रा”

विहंगम योग टाटा संत समाज द्वारा निकाली गई – “स्वर्वेद यात्रा”

मंगलवार को सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान द्वारा आयोजित दशम विश्वव्यापी स्वर्वेद यात्रा में देश के कई राज्यों के सैकड़ों स्थानों पर एक दिन, एक साथ, एक समय बैनर के तले, संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के सानिध्य में भव्य एवं दिव्य ‘स्वर्वेद यात्रा’ निकाली गई।

इसी क्रम में विहंगम योग टाटा संत समाज के पूर्वी सिंहभूम जिला द्वारा बिस्टुपुर 8 जुबली रोड स्थित आश्रम से बिजेंदर उपाध्याय की अध्यक्षता में “स्वर्वेद यात्रा” निकाली गई जो कि सर्किट हाउस एरिया होते हुए पुनः आश्रम पर आकर समाप्त हुई। यात्रा उपरांत पुरोहित महावीर विद्यार्थी द्वारा सत्संग की व्यवस्था की गई थी, प्रसाद वितरण कर आयोजन का समापन हुआ।

यात्रा में उपस्थित विहंगम योग के अनुयायी हाथों में स्वर्वेद एवं “अ” अंकित श्वेत ध्वजा लेकर जयकारा लगा रहे थे।

ज्ञात हो कि विहंगम योग के प्रणेता, अमर हिमालय योगी, अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की अमूल्य कृति ‘स्वर्वेद’ अध्यात्म जगत का अद्वितीय सद्ग्रन्‍थ है। यह हिमालय की कन्दरा में, योग-समाधि अवस्था में प्राप्त अनुभवों की अभिव्यक्ति है। स्वर्वेद- (स्वः+वेद) का शाब्दिक अर्थ है, आत्मा एवं परमात्मा का यथार्थ ज्ञान।

स्वर्वेद के दोहों के पठनमात्र से हमारे शुभ संस्कार जागृत होने लगते हैं, अशुभ वृत्तियों का नाश होने लगता है। जीवन के हर मोड़ पर स्वतः दिशा-बोध होने लगता है। स्वर्वेद हमारी साधना में भी विशेष रूप से सहयोगी है।
मानवता के सम्यक् विकास के लिए स्वर्वेद का प्रचार बहुत जरूरी है। अध्यात्म मानव जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके बिना हम जीवन में दिशाविहीन होकर अनेक कष्ट पाते हैं। जन – जन तक, मन – मन तक और घर – घर तक स्वर्वेद एवं विहंगम योग की विमल ज्ञानधारा को पहुंचाने के उद्देश्य से सम्पूर्ण विश्व में एक साथ-एक समय-एक दिन “स्वर्वेद यात्रा” का आयोजन किया जाता है।

यात्रा में कार्यालय प्रमुख कुबेर शर्मा , जिला संयोजक बिजेन्दर उपाध्याय, समन्वयक नीरज मिश्रा, भीमराज अग्रवाल, मुन्ना प्रसाद, अनिल सिंह, रामचंद्र भोलू, उमेश यादव, बीरबल प्रसाद, बबीता अग्रवाल, अजय प्रजापति, अमन, जीवन लाल संग बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।

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