सेवा में,
सम्मानित सम्पादक महोदय,
सभी दैनिक अखबार एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ।
विषय :गुरू जी नहीं रहें !!
महाशय,
पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी जिला का. नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनकर ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में गुरू जी को दी श्रद्धांजलि। धर्मेंद्र सोनकर ने कहा कि पिछले तकरीबन डेढ़ महीनों से गुरू जी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में इलाजरत थे। अपनी जिंदगी का एक लंबा हिस्सा संघर्ष में बिताने वाले गुरू जी ने मौत से भी जमकर संघर्ष किया पर आज सुबह उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली और हमेशा के लिए मरांग बुरू की शरण में चले गए।
यूं ही कोई दिशोम गुरू या गुरू जी नहीं बन जाता। एक उम्र का संघर्ष, त्याग और बलिदान की पूंजी लगती है तब कहीं जाकर कोई गुरू जी का मुकाम हासिल करता है। राजनीति का वो दौर जबकि कांग्रेस और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा देश की मुख्य राजनीतिक ताकतें थी और क्षेत्रीय राजनीति में भी लालू यादव जैसे ऐतिहासिक कद के नेता का दबदबा हो, वहां सबकी नाक के नीचे एक अलग राज्य का निर्माण करवा कर आदिवासी अस्मिता को उसकी अलग पहचान दिलवाना कोई विरले ही कर पाता है।
गुरू जी का जन्म 11जनवरी, 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन पेशे से शिक्षक थे जिनकी हत्या सूदखोर महाजनों द्वारा किए जाने के बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़ कर राजनीति में कदम रखा एवं आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष करना शुरू किया।
उन्होंने महाजनों एवं सूदखोरों के खिलाफ़ आदिवासियों को एकजुट किया। धनकटनी आंदोलन जैसे अभियानों के जरिए सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ीं एवं आदिवासियों के बीच शिक्षा के महत्व की अलख जगाई। 4 फरवरी, 1973 को झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग को एक राजनीतिक आंदोलन में बदलने की नींव रखी।
जाने कितने नेता-जनप्रतिनिधि आए-गए और जाने कितने आएंगे-जाएंगे पर आदिवासी पहचान के संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप देकर एक अलग राज्य का गठन करवा लेना एक ऐसी उपलब्धि है जिस पर हम तमाम झारखंडियों को हमेशा गर्व रहेगा।
झारखंड के रामगढ़ जिले के एक छोटे से गांव नेमरा से निकलकर झारखंड की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले जननेता, आदिवासी पहचान को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने वाले एक आंदोलनकारी एवं झारखंड राज्य के जनक दिशोम गुरू शिबू सोरेन का जाना महज़ एक जीवन का अंत नहीं बल्कि एक युग का अंत है। झारखंड के आदिवासी आंदोलन की किताब का आज सबसे महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हुआ।
झारखंड के जनक दिशोम गुरू शिबू सोरेन को अंतिम जोहार। मरांग बुरू हमारे गुरू जी के शोक संतप्त परिवार एवं उनके चाहने वालों को इस असीम दुख को सहने की ताकत प्रदान करें।
श्रद्धांजलि सभा में कॉंग्रेस झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री केशव कमलेश महतो, डॉक्टर अजय कुमार,अल्पसंख्यक आयोग के वाइस चेयरमैन राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त ज्योति माथारू , पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के जिला का. नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनकर,अमरजीत सिंह अजितेश उज्जैन नम आँखों से सम्मिलित हुए।





