न्याय की गुहार : पुलिस की निष्क्रियता से पीड़ित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

न्याय की गुहार : पुलिस की निष्क्रियता से पीड़ित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

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जमशेदपुर : जिले में पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निवासी द्वारा दर्ज कराए गए कई गंभीर मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह स्थिति तब है जब न केवल आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराए जा चुके हैं, बल्कि उच्चाधिकारियों से भी बार-बार शिकायत की जा चुकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चांडिल, सीतारामडेरा, साइबर क्राइम, बिष्टुपुर और गोलमुरी थाना क्षेत्रों में विभिन्न धाराओं के तहत कुल पांच मामलों में अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामले गंभीर अपराधों से जुड़े हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, साइबर अपराध, और हत्या से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

इन मामलों के आरोपी रविंदर सिंह, मनमीत कौर, मनजोत सिंह, हर्षवीर सिंह, तर्जित सिंह, अमरदीप कौर एवं अन्य के विरुद्ध चांडिल थाना कांड संख्या 215/2024, सीतारामडेरा थाना कांड संख्या 05/2025, साइबर क्राइम थाना कांड संख्या 74/2023, बिष्टुपुर थाना कांड संख्या 21/2024 और गोलमुरी थाना कांड संख्या 09/2025 दर्ज किए गए हैं।

पीड़ित का कहना है कि संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को बार-बार गवाही एवं आवश्यक दस्तावेज सौंपने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी सक्षम न्यायालय ने इन मामलों में कोई स्थगन आदेश (स्टे) भी जारी नहीं किया है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है। पीड़ित के अनुसार, मामलों में पर्याप्त दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अनुसंधानकर्ताओं द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है।

पीड़ित ने जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में यह संदेह गहराने लगा है कि कहीं न कहीं पुलिस अभियुक्तों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ पहुंचा रही है।

इस स्थिति में पीड़ित को न्याय की उम्मीद धूमिल होती दिख रही है। पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से पीड़ित हताश है और अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के माध्यम से अपनी गुहार लगा रहा है। पीड़ित का कहना है कि यदि जल्द से जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो उसे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

अब देखना यह होगा कि जिला पुलिस प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और न्याय की गुहार लगा रहे व्यक्ति को कब तक इंसाफ मिलता है।

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