रांची विस सचिवालय पेश नहीं कर पाया विक्रमादित्य आयोग की रिपोर्ट,विस सचिवालय ने जस्टिस प्रसाद की मूल रिपोर्ट मांगी

झारखंड: विधानसभा में नियुक्ति में हुई गड़बड़ी की जांच करने वाले जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद आयोग की रिपोर्ट विधानसभा की ओर से को हाईकोर्ट में पेश नहीं की जा सकी. विधानसभा सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग की रिपोर्ट नहीं मिल सकी है. अब विधानसभा सचिवालय ने जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय से जस्टिस विक्रमादित्य आयोग की रिपोर्ट का मूल प्रतिवेदन मांगा है.

विधानसभा ने जस्टिस मुखोपाध्याय को भेजे गए पत्र की कॉपी भी कोर्ट में पेश की और रिपोर्ट पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया है. चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने समय देते हुए सुनवाई नौ नंवबर को निर्धारित की. सुनवाई के दौरान प्रार्थी शिवशंकर शर्मा का पक्ष रख रहे अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया कि विधानसभा में गलत तरीके से नियुक्त अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए आयोग से सुझाव मांगा गया है. सरकार की मंशा विधानसभा में गलत तरीके से चयनित लोगों को बचाने की है.नहीं हो रही कार्रवाई, मामला लंबा खींचा जा रहा इसके पूर्व प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले की जांच को लेकर पहले जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय कमीशन बनी थी, जिसने मामले की जांच कर राज्यपाल को वर्ष 2018 में रिपोर्ट सौंपी थी. जांच रिपोर्ट में 20 ऐसे बिंदु का जिक्र किया गया है, जिसमें अनियमितता पायी गयी है. इसके आधार पर राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. लेकिन वर्ष 2021 के बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. राज्यपाल के दिशानिर्देश के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस मामले को लंबा खींचा जा रहा है. मामले में देरी होने से गलत तरीके से चयनित होने वाले अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे. वहीं, विधानसभा की ओर से बताया गया था कि जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की रिपोर्ट पूरी तरीके से स्पेसिफिक नहीं थी. जिस कारण जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद के कमीशन की रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली कमीशन बनी है.

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