उप श्रमायुक्त(डीएलसी) जमशेदपुर द्वारा रांची हाईकोर्ट के निर्देश पर 30 सितंबर टाटा मोटर्स प्रबंधन को स्थाई प्रकृति कार्य को करने वाले अस्थाई कर्मचारियों को टीम माह के अंदर स्थाई करने की योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. उक्त जानकारी वरीय अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने रविवार को साकची में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों को दी. उन्होंने बताया कि पिछले 30 वर्षों से टाटा मोटर्स प्रबंधन द्वारा श्रम कानून का उल्लंघन करते हुए कंपनी के अंदर स्थाई प्रकृति के कार्य को अस्थाई कर्मचारियों द्वारा कराया जाता है. कई ऐसे मजदूर है जो 30 वर्षों तक कंपनी अस्थाई कर्मचारी के तौर पर काम करते हुए सेवानिवृत हो गए. वैसे कर्मियों को कोई लाभ नहीं मिल पाया. जिसको लेकर अस्थाई कर्मचारियों ने 2018 में मुंबई हाईकोर्ट में टाटा मोटर्स प्रबंधन के खिलाफ याचिका दायर की. जिसकी सुनवाई करते हुए मुंबई हाईकोर्ट टाटा मोटर्स द्वारा किए जा रहे श्रम कानून के उल्लंघन को सही पाया और 2022 सितंबर ने कंपनी प्रबंधन को आदेश दिया की अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करे और जब से वो कार्यरत है उस समय से स्थाई कर्मचारियों को मिलने वाला लाभ उन्हे प्रदान करे. टाटा मोटर्स प्रबंधन हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाईकोर्ट के आदेश को सही पाया और याचिका को खारिज कर दिया. हम लोगों ने मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के आधार रांची हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्यायलय से अगर किया हाईकोर्ट टाटा मोटर्स प्रबंधन को आदेश दे. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए डीएलसी को निर्देश दिया की वो टाटा मोटर्स प्रबंधन से वार्ता कर सभी अस्थाई कर्मचारियों को यथाशीघ्र स्थाई कराए और उन्हे स्थाई कर्मचारियों का लाभ दिलाए. प्रेस वार्ता में अफसर जावेद उपस्थित थे.





