एनआईटी जमशेदपुर में SIMPLE 2026 का सफल समापन, संरचनात्मक सुरक्षा एवं औद्योगिक उपकरणों की कार्यावधि बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

एनआईटी जमशेदपुर में SIMPLE 2026 का सफल समापन, संरचनात्मक सुरक्षा एवं औद्योगिक उपकरणों की कार्यावधि बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

जमशेदपुर, 3 नवंबर 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), जमशेदपुर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला “स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी मैनेजमेंट एंड प्रोटोकॉल्स फॉर लाइफ एक्सटेंशन” (SIMPLE 2026) का मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यशाला 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक आयोजित की गई, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों एवं विभिन्न उद्योगों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर संरचनात्मक सुरक्षा, पदार्थों में होने वाली क्षति, गैर-विनाशकारी परीक्षण, कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन तथा औद्योगिक उपकरणों की शेष कार्यावधि के आकलन से संबंधित आधुनिक तकनीकों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला का समापन समारोह एनआईटी जमशेदपुर के डीजेएलएचसी-212 सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर के मैटेरियल्स इंजीनियरिंग डिवीजन के वैज्ञानिक-जी डॉ. एस. शिवप्रसाद, विशिष्ट अतिथि के रूप में एनआईटी जमशेदपुर के कुलसचिव प्रो. सरोज कुमार सारंगी तथा मुख्य संरक्षक के रूप में संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजन सचिव ने पाँच दिवसीय कार्यशाला की प्रमुख गतिविधियों, तकनीकी सत्रों एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के आयोजन सलाहकार डॉ. सौमित्र तरफदार ने अपने संबोधन में संरचनात्मक अखंडता के वैज्ञानिक मूल्यांकन, औद्योगिक उपकरणों में उत्पन्न होने वाली विभिन्न प्रकार की क्षति तथा उनकी शेष उपयोगी कार्यावधि के आकलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी औद्योगिक संरचना या उपकरण की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसके पदार्थों के गुणों, कार्य परिस्थितियों एवं समय के साथ होने वाले क्षरण को समझना अत्यंत आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. सरोज कुमार सारंगी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। संस्थान के निदेशक एवं कार्यशाला के मुख्य संरक्षक प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी आयोजन शैक्षणिक ज्ञान, अनुसंधान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक तकनीकों के विकास, अनुसंधान सहयोग तथा व्यावहारिक कौशल संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. एस. शिवप्रसाद ने अपने संबोधन में औद्योगिक उपकरणों एवं संरचनाओं की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में पदार्थ अभियांत्रिकी, क्षति विश्लेषण तथा संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि औद्योगिक संयंत्रों में लंबे समय तक उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करना आवश्यक है, ताकि संभावित विफलताओं को समय रहते पहचाना जा सके तथा उनकी सुरक्षित कार्यावधि बढ़ाने के लिए उचित निर्णय लिए जा सकें।

पाँच दिवसीय कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन, पदार्थों में क्षति उत्पन्न होने की प्रक्रिया, संक्षारण, थकानजनित दरारें, उच्च तापमान पर पदार्थों का व्यवहार, सतही क्षरण, विफलता विश्लेषण, क्षतिग्रस्त पदार्थों का सूक्ष्म संरचनात्मक परीक्षण, सिमुलेशन एवं मॉडलिंग तथा गैर-विनाशकारी परीक्षण एवं मूल्यांकन (NDT&E) जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर विस्तृत व्याख्यान दिए। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को औद्योगिक उपकरणों में दोषों की पहचान, उनकी गंभीरता के आकलन, पदार्थों की यांत्रिक क्षमता के मूल्यांकन तथा उचित अभियांत्रिकी मानकों के आधार पर उनकी शेष उपयोगी कार्यावधि निर्धारित करने की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।

कार्यशाला में आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली, बिग डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन और मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकें औद्योगिक संरचनाओं की स्थिति की निगरानी एवं पूर्वानुमान आधारित रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन तकनीकों की सहायता से उपकरणों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे संभावित खराबियों की प्रारंभिक पहचान तथा रखरखाव संबंधी निर्णयों में सुधार संभव है। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि परंपरागत परीक्षण विधियों के साथ आधुनिक डिजिटल तकनीकों का समन्वित उपयोग उद्योगों में सुरक्षा, गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं उत्पादन दक्षता को बेहतर बना सकता है।

इस कार्यशाला का आयोजन एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के मुख्य संरक्षण, धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. अशोक कुमार के संरक्षण तथा विभागाध्यक्ष डॉ. सी. एस. चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रकाश सरकार एवं डॉ. मोनालिसा मंडल, जबकि आयोजन सचिव डॉ. राम कृष्ण एवं डॉ. अरविंद गली रहे। आयोजन सलाहकार डॉ. सौमित्र तरफदार ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। आयोजन समिति, विभाग के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों से पाँच दिवसीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

समापन समारोह के अंत में संयोजक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, संस्थान के निदेशक, आमंत्रित विशेषज्ञों, आयोजन समिति के सदस्यों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ औपचारिक कार्यक्रम का समापन हुआ। समारोह के उपरांत सामूहिक छायाचित्र, जलपान एवं आपसी संवाद सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों तथा प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में तकनीकी एवं अनुसंधान सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

SIMPLE 2026 ने शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं एवं उद्योगों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान तथा तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यशाला से यह संदेश सामने आया कि औद्योगिक उपकरणों एवं संरचनाओं की सुरक्षित कार्यावधि बढ़ाने के लिए केवल दोषों की पहचान पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्षति के कारणों, पदार्थों की विशेषताओं, कार्य परिस्थितियों, इंजीनियरिंग मानकों तथा आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों का समन्वित अध्ययन भी आवश्यक है। इस आयोजन ने संरचनात्मक सुरक्षा, औद्योगिक विश्वसनीयता, आधुनिक परीक्षण तकनीकों एवं सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं को रेखांकित किया। कार्यशाला का समापन भविष्य में उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने की सकारात्मक भावना के साथ हुआ।

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