दशकों तक कॉर्पोरेट एथिक्स को मुख्य रूप से अनुपालन के दृष्टिकोण से देखा जाता था

एथिक्स: जिम्मेदार व्यवसाय की नई परिभाषा

सोनी सिन्हा

चीफ एथिक्स काउंसलर

टाटा स्टील

उद्देश्य कानूनों, नियमों और संगठन की आंतरिक नीतियों का पालन सुनिश्चित करना था। आज इसकी भूमिका में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। एथिक्स अब केवल अनुपालन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक रणनीतिक व्यावसायिक आवश्यकता बन गई है, जो यह तय करती है कि संगठन किस प्रकार इनोवेशन करते हैं, टेक्नोलॉजी का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग और संचालन करते हैं, स्टेकहोल्डर्स के साथ जुड़ते हैं तथा सतत मूल्य का सृजन करते हैं।

यह बदलाव विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बढ़ती सार्वजनिक जवाबदेही के इस दौर में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जैसे-जैसे व्यवसाय टेक्नोलॉजी और डेटा पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, गोपनीयता, जवाबदेही, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार एआई से जुड़े नैतिक प्रश्न प्रमुखता से सामने आए हैं। आज के दौर में, आपस में परस्पर रूप से जुड़ी हुई दुनिया में, जहाँ किसी संगठन की प्रतिष्ठा पलभर में बन भी सकती है और बिगड़ भी सकती है, वहाँ विश्वास केवल इस बात से नहीं तय होता कि संगठन क्या हासिल करते हैं, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि वे उसे किस तरीके से हासिल करते हैं।

निवेशकों, नियामक संस्थाओं, ग्राहकों और समुदायों की अपेक्षाएँ भी अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग तथा पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ESG) से जुड़े प्रदर्शन को अब व्यवसाय की मजबूती और दीर्घकालिक मूल्य सृजन के महत्वपूर्ण संकेतकों के रूप में व्यापक मान्यता प्राप्त है। भारत में, सेबी (SEBI) की बिज़नेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) जैसी रूपरेखाएँ संगठनों को अपनी मुख्य व्यावसायिक रणनीति में नैतिक निर्णय-निर्माण को समाहित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

आज के समय में एथिक्स का दायरा लोगों से जुड़े कार्यस्थल संबंधी व्यवहार और नीतियों तक भी समान रूप से विस्तृत हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भेदभाव, अत्यधिक कार्यभार, नौकरी की असुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी प्रतिकूल कार्य परिस्थितियाँ कर्मचारियों के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं। वैश्विक स्तर पर, अवसाद और चिंता के कारण हर वर्ष लगभग 12 अरब कार्यदिवस नष्ट हो जाते हैं, जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था को उत्पादकता में कमी के कारण लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक नुकसान होता है। ये आँकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि सुरक्षित, समावेशी और मनोवैज्ञानिक रूप से भरोसेमंद कार्यस्थलों का निर्माण आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

संगठन की सीमाओं से परे भी अब व्यवसायों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे मानवाधिकारों का सम्मान करें, रिस्पॉन्सिबल सोर्सिंग को बढ़ावा दें और अपनी सप्लाई चेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। व्यवसाय और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों ने ह्यूमन राइट्स ड्यू डिलिजेंस को एक वैश्विक मानक के रूप में स्थापित किया है। यह इस बात को स्वीकार करता है कि जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण संगठन की मजबूती, स्टेकहोल्डर्स के विश्वास और सतत विकास की आधारशिला है।

जेआरडी टाटा के इस विश्वास से प्रेरित होकर कि नैतिक आचरण ही निरंतर सफलता की आधारशिला है, टाटा स्टील उद्देश्यपूर्ण नवाचार और विकास की अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रही है। जिम्मेदार व्यवसाय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता वर्ष 2045 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने की हमारी आकांक्षा, रॉ मटेरियल के जिम्मेदार प्रबंधन पर हमारे विशेष ध्यान तथा अधिक सस्टेनेबल स्टील मेकिंग के लिए हाइसरना (HIsarna) और ईजीमेल्ट (EASyMelt) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। विभिन्न देशों और क्षेत्रों में अपने विस्तार के साथ भी हमारी साझा आचार संहिता हमारी मार्गदर्शक बनी हुई है, जो प्रत्येक निर्णय को सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के मूल्यों से संचालित करती है। एक सशक्त स्पीक-अप संस्कृति के माध्यम से हम अपने कर्मचारियों को अपनी बात खुलकर रखने, प्रश्न पूछने, चिंताओं को साझा करने और हर दिन सही कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

वन कोड। वन कमिटमेंट। वन टाटा। यूनिफाइड बाय द कोड।

यह केवल एथिक्स मंथ की थीम नहीं है, बल्कि वह साझा सूत्र है जो हमें विभिन्न व्यवसायों, भौगोलिक क्षेत्रों और विविध पृष्ठभूमियों के बावजूद एक-दूसरे से जोड़ता है और हमें वन टाटा स्टील के रूप में एकजुट करता है।

सोनी सिन्हा

चीफ एथिक्स काउंसलर

टाटा स्टील

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