चाईबासा: झींकपानी थाना क्षेत्र के हरिजन हाटिंग निवासी जीतन राय ने चक्रधरपुर थाना प्रभारी को आवेदन देकर अपनी भतीजी करिश्मा राय की संदिग्ध मृत्यु के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में मृतका के भाई जीतन राय ने बताया है कि करिश्मा राय, पिता अभिजीत राय, का प्रेम विवाह देवानंद प्रधान के साथ हुआ था। उसका ससुराल चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के चेनपुर पानसुआ गांव में है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विवाह के बाद से ही करिश्मा को दहेज की मांग को लेकर लगातार मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
आवेदन के अनुसार, करिश्मा के पति देवानंद प्रधान, देवर देवेंद्र प्रधान, ससुर निर्मल प्रधान तथा सास मंजुरा प्रधान के द्वारा उसके साथ क्रूर व्यवहार किया जाता था। आरोप है कि विशेष रूप से देवर देवेंद्र प्रधान द्वारा कई बार मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और मानसिक उत्पीड़न किया गया, जिससे वह लगातार भय और तनाव में रहती थी।

जीतन राय ने यह भी आरोप लगाया है कि गर्भावस्था के दौरान करिश्मा को उचित देखभाल नहीं मिली। बच्ची के जन्म के बाद उसे सदर अस्पताल, चाईबासा में छोड़ दिया गया, जहां भी उसकी समुचित देखभाल नहीं की गई। इसके बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और 16 जुलाई 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।
आवेदन में दावा किया गया है कि उनके पास मामले से संबंधित एक महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है। आरोप है कि वीडियो में एक व्यक्ति, जिसे झाड़-फूंक करने वाला बताया गया है, करिश्मा के साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में कुछ अन्य लोग भी करिश्मा को पकड़कर रखे हुए नजर आ रहे हैं। जीतन राय ने पुलिस को यह वीडियो उपलब्ध कराने की बात कही है तथा इसकी फॉरेंसिक जांच कराने, वीडियो में दिख रहे सभी लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ करने की मांग की है।
उन्होंने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उन्हें सूचना मिली है कि मृतका के पति की अनुपस्थिति में शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया जा रहा था, इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की आशंका जताते हुए उन्होंने पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप कर शव का पंचनामा, पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की है।
जीतन राय ने अपने आवेदन में पुलिस से आग्रह किया है कि मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जाए। साथ ही वीडियो, मोबाइल फोन, अस्पताल के अभिलेख, गवाहों के बयान तथा अन्य सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।




