*बंदूक और बारूद की दुनिया में रहने वाले नक्सलियों की जिंदगी में भी प्रेम की कहानी छिपी होती है. ऐसी ही एक कहानी एरिया कमांडर नक्सली बुधराम मुंडा की सामने आई थी. बुधराम अपनी प्रेमिका के लिए नक्सली संगठन छोड़ना चाहता था. लेकिन मौत ने उसे यह मौका नहीं दिया.*
*बुधराम ने अपनी प्रेमिका को पत्र लिख संगठन छोड़ने के लिए एक साल का समय मांगा था, लेकिन इससे पहले ही वह सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ गया. सुरक्षा बलों ने चाईबासा और खूंटी जिले की सीमा पर चलाए गए अभियान में बुधराम मुंडा को मार गिराया.*
*वह हथियारों की दुनिया से बाहर निकलकर सामान्य जीवन जीने का सपना देख रहा था. बुधराम मुंडा लंबे समय से चाईबासा और खूंटी जिले के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था. वह कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहा, लेकिन प्यार ने उसकी सोच बदल दी थी. वह अपनी प्रेमिका से पत्र के माध्यम से ही बात करता था. उसके मारे जाने के बाद यह प्रेम कहानी चर्चा में आई थी. बंदूक के साए में जीने वाला नक्सली बुधराम प्रेमिका के लिए नई राह चुनना चाहता था. लेकिन उससे पहले ही उसकी जिंदगी का अंत हो गया और उसका प्यार अधूरा रह गया.*






