किताडीह ग्वाला पट्टी में रेलवे की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान बवाल, अधिकारियों से मारपीट का आरोप

किताडीह ग्वाला पट्टी में रेलवे की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान बवाल, अधिकारियों से मारपीट का आरोप
जमशेदपुर के किताडीह स्थित ग्वाला पट्टी क्षेत्र में 27 अप्रैल 2026 को रेलवे प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद स्थिति विवाद और झड़प में बदल गई।
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन को लेकर लंबे समय से दो पक्षों के बीच मतभेद बना हुआ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उक्त जमीन सहेन्द्र यादव की पत्नी शांति देवी के नाम दर्ज है, जबकि रेलवे प्रशासन इस भूखंड को अपनी संपत्ति बताते हुए वहां बने निर्माण को अवैध अतिक्रमण करार दे रहा है। मामले को लेकर उस वक्त और सवाल उठे जब रेलवे की ओर से जारी नोटिस में मेघा यादव का नाम अंकित पाया गया, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस नाम से वहां कोई मकान या निर्माण मौजूद नहीं है।
रेलवे प्रशासन की ओर से बताया गया कि चक्रधरपुर मंडल के संपदा पदाधिकारी द्वारा पारित आदेश (मामला संख्या EC/EO/344/2025) के अनुपालन में यह कार्रवाई की जा रही थी। अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।
कार्रवाई के दौरान रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि सरकारी कर्तव्य का निर्वहन करते समय जितेंद्र यादव, राजकमल यादव और सहेन्द्र यादव अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और कार्रवाई का विरोध करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसमें अधिकारी के दाहिने हाथ और बाएं पैर के घुटने में चोट लगी।
घटना के बाद तैयार संयुक्त जांच प्रतिवेदन (कार्यवृत्त), जिस पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, में यह उल्लेख किया गया है कि हाथापाई की शुरुआत संबंधित लोगों द्वारा की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर स्पष्टता के बिना कार्रवाई करना उचित नहीं है और इससे निर्दोष लोगों को नुकसान हो सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी भी अंतिम कार्रवाई से पहले सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए और प्रभावित पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

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