प्रेस विज्ञप्ति
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*जमशेदपुर की युवा कला- नाट्य ट्रस्ट गीता थिएटर बिहार राज्य मे आयोजित भागलपुर रंग महोत्सव 2025 मे शामिल हो राष्ट्रीय मंच नाटक एव नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता मे लिया हिस्सा
लौहनगरी जमशेदपुर युवा कला-नाट्य ट्रस्ट गीता थिएटर महाभारत काल के राजा दानवीर कर्ण की धरती अंग प्रदेश भागलपुर बिहार मे आयोजित 03 दिवसीय 12वें भागलपुर रंग महोत्सव 2025 के राष्ट्रीय मंच नाट्य एवं नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता मे सम्मलित हुई।
कल 20 दिसम्बर 2025 की संध्य भागलपुर कला केन्द्र परिसर मे आयोजित भागलपुर रंग महोत्सव राष्ट्रीय मंच नाट्य प्रतियोगिता 2025“म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर” महिलाओ पर आधारित नाटक की प्रस्तुति दिया।
वहीं आज नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता 2025 मे डायन प्रथा अभियान के प्रति जन जागरूकता हेतु“मैं डायन नही हूँ”नामक नुक्कड़ नाटक मंचन भागलपुर के घंडा चौक मे हुआ।
मंच नाटक – म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर
यह नाटक पांच महिलाओं की पीड़ा और संघर्ष का प्रतिरूप है इस नाटक के माध्यम से हम बताना चाहते हैं कि कैसे महिला नामक प्रजाति का में लगातार परिवर्तन के आज वो प्रजाति का लुप्त होना पूरे परिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है और कैसे प्रकृति व समाज इस कमजोर वर्ग को हास्य स्थिति पर ले आया है अब इनको संरक्षण जरूरी है।
यह नाटक समाज में हास्य पर मौजूद प्रजाति महिलाओं के अस्तित्व के संघर्ष को एक म्यूजियम के रूप मे प्रस्तुत करता है जहां वह प्रदर्शन की वस्तु बन गए हैं ।
हम नाटक के माध्यम से दर्शको को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं की कैसे समाज महिला को सिर्फ पूज्यनीय मानने हुए भी उनके मन को समझाने की कोशिश नहीं करता है।
इस नाटक के स्त्री पात्रों ने अपने पात्रों की आपबीती बताया है ताकि समाज जागें और महिलाओं की दर्द को महसूस करें और उनके प्रति संवेदनशील है।
पात्र परिचय
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• गीता कुमारी – शिरीन
• प्रतिज्ञा पाण्डेय – कन्या • खुशी पाण्डेय – भंवरी
• पूर्णिमा सूंड़ी – पूजा
• सृष्टि साह – रिंकू
• तुफैल रज़ा – लड़का
• अंनत सरदार – सूत्रधार
÷ अवधारणा – रशिका अगाशी
÷ आलेख – सुमेध
÷ निर्देशक – प्रेम दीक्षित
नुक्कड़ नाटक – मैं डायन नही हूँ
“मैं डायन नहीं हूं” एक नुक्कड़ नाटक है जो डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए बनाया गया है। यह नाटक एक महिला की कहानी है जिसे गलत तरीके से डायन कहा जाता है और समाज द्वारा उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
नाटक में दिखाया गया है कि कैसे एक महिला को उसकी जाति, उम्र और सामाजिक स्थिति के कारण डायन कहा जाता है और उसके साथ भेदभाव किया जाता है। नाटक का उद्देश्य लोगों को डायन प्रथा के खिलाफ जागरूक करना और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
नुक्कड़ नाटक एक शक्तिशाली माध्यम है जो समाज में बदलाव लाने के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह नाटक लोगों को जागरूक करने और उनके विचारों को बदलने में मदद कर सकता है।
पात्र- परिचय
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महिला (डायन) – खुशी पाण्डेय
बेटी – संतुष्टि साह
नन्द – प्रतिज्ञा पाण्डेय
सुत्रधार – गीता कुमारी
जेठानी – पूर्णीमा सूडी
जेठ – अंनत सरदार
जेठ का बेटा – तुफैल रज़ा
अध्यापक – आयुष यादव
△ लेखिका – गीता कुमारी
△ निर्देशक – प्रेम दीक्षित
कल 22 दिसम्बर 2025 को प्रातः 8 बजे भागलपुर रंग महोत्सव 2025 का रंग जुलूस आयोजित होगा जिसमें 10 राज्यों के 16 से अधिक कला- संस्कृतिक, नाट्य, नृत्य दल अपने अपने संदेश प्रस्तुति के साथ नगर भ्रमण करेंगे। जिसके बाद संध्या पुरस्कार वितरण समारोह कार्यक्रम आयोजित होगा।






