*झारखंड में वित्तीय संकट है, स्थिति इतनी ख़राब है कि कई विभाग के ठेकेदारों का पेमेंट साल भर से लटका हुआ है और हाल फिलहाल मिलने की कोई उम्मीद भी नहीं।*
*विकास कार्य रुके हुए हैं, कहीं कुछ काम नहीं हो रहा। अगर झारखंड सरकार को कहीं से आर्थिक मदद नहीं मिली तो राज्य दिवालिया होने के कगार पर है।*
*बहुत से नेता ये कहकर जनता को बरगलायेंगे कि अगर केंद्र सरकार ने झारखंड को मदद नहीं दी तो हम कोयला और अन्य खनिजों को राज्य से बाहर नहीं जाने देंगे। जनता को टेक्निकल चीज़ें शायद उतना पता नहीं होता, इसीलिए जिंदाबाद मुर्दाबाद चल जाता है। पर कोई भी राज्य अपने यहां से खनिजों की सप्लाई रोक ही नहीं सकता। अगर ऐसा कर सकते तो अब तक कर चुके होते।*
*Moral of the Story is that की “मईया सम्मान योजना” के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है।*
*अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर भी आफ़त है। वैसे आफ़त तो कोर्ट केस का भी है।*
*ये मुलाकात इसी सब को लेकर हुई है।*
*समाचार समाप्त हुए*☺
*नमस्कार*🙏







