सैनिक कभी रिटायर नहीं बल्कि मरते दम तक सैनिक ही रहते हैं- सुशील कुमार सिंह
भारतीय नौसेना में 19 जनवरी 1993 से 31 जनवरी 2008 तक सेवा देने के बाद समाज में निरंतर सेना के द्वारा मिला प्रशिक्षण एवं अनुशासन को राष्ट्रहित समाजहित एवं सैन्यहित में लगाने का प्रयास रहता है। सेवानिवृत्ति के बाद केवल वर्दी उतरती है जबकि इंसान के अंदर का फौजी हमेशा जिंदा रहता है। यह बात लेफ्टिनेंट जनरल रामचंद्र तिवारी जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ पूर्वी कमान ने हमें प्रशस्ति मेडल देते समय कहा था। टाटा स्टील के ट्रेनिंग विमान को निकालने में भारतीय नौसेना के गोताखोरों एवं सर्वे टीम का भीषण बारिश में विषम चुनौतियों का सामना करते हुए काम करने का मौका मिला और चार दिन के अथक प्रयास के बाद चांडिल डैम में 7 किलोमीटर अंदर पानी में गिरे विमान को लाने में 14 घंटे का समय लगा था। दिन रात बारिश में भीग कर काम करने का अनुभव आज भी याद करने पर रोंगटे खड़े कर देता है। शहर में रह रहे तीनों सेना से सेवानिवृत सैनिकों को मुख्य धारा में जोड़कर प्राकृतिक आपदा एवं प्रशासनिक जरूरतों को निःस्वार्थ पूरा करने का प्रयास रहता है।







