दिनांक: 31 जुलाई 2025
स्थान: जमशेदपुर, झारखंड
NUSRL रांची में आदिवासी छात्रा के साथ पक्षपात – न्याय की गुहार
झारखंड के जमशेदपुर निवासी रमेश हांसदा ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में अपनी पुत्री रूपी हांसदा के साथ हुई प्रवेश प्रक्रिया में पक्षपात को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
रूपी हांसदा, जिन्होंने CLAT-2025 (Common Law Admission Test) में ST कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक 51283 प्राप्त की थी, का नाम 23 जुलाई 2025 को प्रकाशित तीसरी सूची में ST कोटे के अंतर्गत चयनित छात्रों में शामिल किया गया था। सूची में उल्लेख था कि ₹3,39,000 की राशि 23 से 26 जुलाई 2025 तक जमा करनी थी।
लेकिन श्री हांसदा के अनुसार, उन्हें किसी भी माध्यम (फोन या ईमेल) से इस चयन की सूचना समय पर प्राप्त नहीं हुई, और इसकी जानकारी 27 जुलाई की शाम को एक परिचित के द्वारा मिली। जब 28 जुलाई की सुबह वे विश्वविद्यालय पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी की सीट को एक अन्य कोटे (SC) के छात्र को स्थानांतरित कर दिया गया है, क्योंकि समय पर शुल्क नहीं जमा हुआ।
श्री हांसदा ने इसे अनुसूचित जनजाति छात्रों के प्रति संस्थागत भेदभाव करार देते हुए कहा है कि इतनी बड़ी राशि इतनी कम समय में जमा कराना और समय पर सूचना न देना एक तरह से आदिवासी छात्रों को प्रवेश से वंचित करने की सुनियोजित कोशिश है। उन्होंने कहा कि ST कोटे की सीट को SC कोटे में स्थानांतरित करना संविधान में प्रदत्त आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने इस विषय में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य श्रीमती आशा लकड़ा को पत्र भेजकर मांग की है कि:
1. रूपी हांसदा को NUSRL, रांची में ST कोटे के अंतर्गत प्रवेश का पुनः अवसर दिया जाए।
2. प्रवेश शुल्क जमा करने की अवधि बढ़ाई जाए।
3. विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य आदिवासी छात्रा इस प्रकार के भेदभाव का शिकार न हो।
श्री हांसदा ने मीडिया से भी अपील की है कि वे इस मामले को प्रमुखता से उठाकर शैक्षणिक संस्थानों में आदिवासी छात्रों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
सम्पर्क हेतु:
रमेश हांसदा
पुरीहासा, सुंदरनगर, जमशेदपुर, झारखंड
मोबाइल: 9431374481
राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य अनुसूचित जनजाति मोर्चा






