हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें जजों के रिटायर होने के बाद राजनीतिक नियुक्त स्वीकार करने से पहले दो साल के कूलिंग ऑफ पीरियड रखने की बात कही गई थी.
इस याचिका में मांग की गई थी कि जज रिटायर होने के फ़ौरन बाद राजनीतिक पद ना लें बल्कि दो साल का इंतज़ार करें.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बारे में क़ानून लाना केंद्र सरकार का काम है और जब तक ये क़ानून नहीं है तब तक जजों को ये तय करने दें कि वो ऐसे किसी पद का ऑफर स्वीकार करते हैं या नहीं?
ये याचिका बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई थी.
इस याचिका पर सुनवाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने की.
जस्टिस कौल ने अपने आदेश में कहा, “लोकसभा के लिए चुनाव, राज्यसभा के लिए नामांकन…इन सब में हम शामिल नहीं हो सकते. रिटायर्ड जज को ऐसा पद स्वीकार करना चाहिए या नहीं, ये जज के विवेक पर छोड़ देना चाहिए.”






