संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो भोजपुरी : कल्पना पटवारी

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो भोजपुरी : कल्पना पटवारी

लोगों को अपने भजन गायन से झुमाने वाली गायिका कल्पना पटवारी मंगलवार को पत्रकारों से रूबरू हुई. इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें कही. कल्पना ने कहा कि इसके पूर्व वह साल 2018 में जमशेदपुर आई थी. इन पांच सालों में शहर में वही सभ्यता देखने को मिली. हर हर महादेव सेवा संघ के इस कार्यक्रम में कई कलाकार आए पर उनमें से ज्यादातर भोजपुरी गायक ही थे. साल 2002 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी और आज 20 सालों बाद जीवन को देखने का नजरिया बदल चुका है. उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा अन्य भाषाओं की तुलना में काफी पीछे है. आज साउथ की फिल्में ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हो रही है, पर भोजपुरी को भारत में ही पूरी तरह से तरजीह नहीं दी जा रही है. इसका सबसे बड़ा कारण भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल ना होना है. भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल ना करवा पाना हमारी नाकामयाबी है. कई बुद्धिजिवियों ने इसके लिए आंदोलन भी किया पर कोई फायदा नहीं हुआ. जब तक भोजपुरी को अनुसूची में शामिल नहीं किया जाएगा तब तक इसे अपनी पहचान नहीं मिल पाएगी.
यूट्यूब से स्ट्रगल का दौर खत्म
कल्पना कहती है कि एक दौर था जब लोगों को मुकाम तक पहुंचने के लिए स्ट्रगल करना पड़ता था पर आज सोशल मीडिया के दौर में स्ट्रगल खत्म सा हो गया है. लोग सोशल मीडिया में अपना हुनर दिखाकर फेमस हो रहे है. वहीं बात की जाए भोजपुरी में अश्लीलता की तो जो लोग ऐसे गाने बनाते है उनमें शिक्षा की कमी होती है. उन्होंने माना कि कुछ गाने ऐसे उन्होंने भी गाए है, पर बाद में एहसास होने पर उन्होंने ऐसे गाने गाना बंद कर दिया. राजनिति को लेकर कल्पना कहती है कि अगर राजनिति में जाने का मौका मिला तो जरूर जाना चाहुंगी और सबसे पहले अपनी भाषा के प्रति कुछ करूंगी.।

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