भारत ने आज चांद पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कराकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ ही पूरा देश इसरो को बधाई दे रहा है। चंद्रयान-3 आज शाम लगभग 6:04 बजे IST पर सफलतापूर्वक चंद्रमा पर उतार लिया गया। प्रधानमंत्री ने दी बधाई।
भारत का मिशन चंद्रयान-3 बुधवार शाम को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। इसकी सफलता के लिए देशभर में विशेष अनुष्ठान और अभिषेक किया जा रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता के लिए मध्य प्रदेश में भी पूजा और प्रार्थनाओं का दौर जारी है। उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में विशेष भस्मारती की गई। भस्मारती में लोग चंद्रयान की तस्वीर और तिरंगा लेकर शामिल हुए। वहीं, इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भक्तों और पुजारियों ने विशेष हवन और आरती की।
छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जहां उन्होंने बालाजी से चंद्रयान-3 की सफलता की कामना की। राजधानी भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच ने चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की कामना के साथ रुद्राभिषेक पूजन किया है। इस पूजा में एक साथ पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ ये रुद्राभिषेक किया और भगवान शंकर से प्रार्थना की। संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि चंद्रयान की सफल लैंडिंग के लिए संस्कृति बचाओ मंच ने भगवान शंकर का रुद्राभिषेक किया है। महादेव के एक गण में चंद्रमा भी हैं। चंद्रमा महादेव के शिखर पर विराजमान हैं। इस कारण भगवान शंकर को चंद्रशेखर भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह जो तीन महीने हैं, इनमें महादेव के पास सारी संपदा रहती है। उनके गण की सफलतम लैंडिंग अब निश्चित है।इसरो के बेंगलुरु स्थित टेलीमेट्री एंड कमांड सेंटर (इस्ट्रैक) के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (मॉक्स) में 50 से ज्यादा वैज्ञानिक कंप्यूटर पर चंद्रयान-3 से मिल रहे आंकड़ों की रात भर पड़ताल में जुटे रहे। वे लैंडर को इनपुट भेज रहे हैं, ताकि लैंडिंग के समय गलत फैसला लेने की हर गुंजाइश खत्म हो जाए।
विक्रम के दो इंजन भी काम नहीं करेंगे तो भी लैंड करेगा चंद्रयान-3
इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ ने 9 अगस्त को विक्रम की लैंडिंग को लेकर कहा था- ‘अगर सब कुछ फेल हो जाता है, अगर सभी सेंसर फेल हो जाते हैं, कुछ भी काम नहीं करता है, फिर भी यह (विक्रम) लैंडिंग करेगा, बशर्ते एल्गोरिदम ठीक से काम करें। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि अगर इस बार विक्रम के दो इंजन काम नहीं करेंगे, तब भी यह लैंडिंग में सक्षम होगा।
पहली लॉन्चिंग
साल 1963 में थुंबा से अपने पहले साउंडिंग रॉकेट के साथ भारत के औपचारिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हुई। 19 अप्रैल 1975 को भारत ने अपने पहले सैटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ को रूस के लॉन्च सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया और अंतरिक्ष की दुनिया में अपना नाम दर्ज कराया। हालांकि, यह एक एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट था, लेकिन इसने भारत के सुनहरे भविष्य के लिये नींव तैयार की थी। उस दौर में इस सैटेलाइट को बनाने और लॉन्च करने में 3 करोड़ का खर्च आया था।






