उ०प्र० संघ की स्थापना वैसे तो 1954 में हुयी थी पर आज का स्वरुप तब प्राप्त हुआ जब उ०प्र० संघ का पंजीकरण सोसाइटी एक्ट में बिहार से हुआ जिसका श्रेय वर्तमान सचिव डा० डी० पी० शुक्ल, श्री वीरेन्द्र सिंह, डा० सी० डी० द्विवेदी को जाता है जिन्होंने श्री वीरेन्द्र सिंह, श्री डा० सी०डी० द्विवेदी, श्री अशोक कुमार दुबे, श्री बालकृष्ण वाजपेयी, श्री प्रहलाद सिंह, श्री आर0 पी 0 त्यागी, श्री राम गोविन्द त्रिपाठी जी श्री जे० एल० अजमानी जी के कुशल नेतृत्व में उ0प्र0 संघ एवम् मोतीलाल नेहरु पब्लिक स्कूल की स्थापना एवम् सफल संचालन कर शहर के 5 अच्छे स्कूलों की कतार में खड़ा कर दिया है।
भविष्य के लिए जितनी योजनायें पिछले 35 वर्षों के दौरान बनायी गयी, अखिलेश दुबे की टीम के नकारात्मक सोच के कारण आरोप प्रत्यारोप लगाकर खरीदी गयी 24 बीघे जमीन जो 2640000 में खरीदी गयी थी, 29,00,000 रुपये में तत्कालीन सचिव श्री अशोक पाण्डेय को मजबूरन बेंच देनी पड़ी इसको जिम्मेदारी तय होनी चाहिये और उन पर कार्यवाही की जानी थी जो नही हुयी इसी तरह कई जमीने जिनसे संस्थान में कई प्रतिष्ठान बन सकते थे अखिलेश दुबे जी हर बार नकारात्मक सोंच के कारण नही बन पाये ये गुट उ०प्र० संघ के बारे में कभी सकारात्मक सोंच नही रख सदैव एन केन प्रकारेण संघ संचालन पर कब्जा जमाने के लिये सदैव झूठे आरोपों का सहारा लिया और डा० डी० पी० शुक्ल पर न जाने कितने झूठे केस किये / कराये, सदस्य इन्हे चुनाव में बार बार नकारते रहे पर इन्होंने संघ को कभी भी सुचारु रुप से चलने नही दिया।
ये जब पहली बार स्वयंभू सचिव, सदस्यों को अपमानित करके, बिना चुनाव के बन गये । बिना किसी संवैधानिक अधिकार के इन्होने करोड़ों रुपये खर्च कर दिये तब इन्होने लगभग 150 सदस्यों को अपमानित करके निकाल बाहर किया था। सदस्यों के घुसने पर मनाही कर दी थी, उसी में मैं भी था बड़े प्रयासों के बाद डी०सी० के हस्तक्षेप से अनुमण्डल पदाधिकारी श्री सी०के० मण्डल ने चुनाव करवाया। बताते चलें कि उस चुनाव को रोकने के लिये भी इन्होंने कोर्ट में केस दायर किया पर चुनाव नही रुका और डा० सी० डी० द्विवेदी महासचिव चुने गये और श्री बालकृष्ण वाजपेयी अध्यक्ष उस समय भी सदस्यों ने इन्हे नकार दिया था ।
गौरी की जमीन हमारे पास उपलब्ध संसाधनो का पूरा उपयोग कर खरीदी गयी किन्तु दलालों को दलाली नहीं मिलने से अखिलेश जी दलालों के साथ मिलकर कई तरह की बाधाएँ खड़ी की पर सफल नहीं हो पाये और अंतिम तौर पर जमीन उ०प्र० संघ के नाम रजिस्टर हो गयी और बाउण्ड्री बनाने के लिए सरकार ने फोर्स की नियुक्ति भी कर दी ।
तब भी ये नहीं चूके फोर्स की नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट चले गये जिसमें भी इनकी साजिश नाकाम रही और स्टे नही मिला ।उ०प्र० संघ के सदस्यों को जहाँ सकारात्मक सहयोग करना चाहिए था वहाँ अखिलेश दुबे अपने निजी स्वार्थ के लिए कुल्हाड़ी का बेंट बन गए है।
जहाँ तक सदस्यता की बात है 481 सदस्यों की मूल पंजी एवम् फार्म मजिस्ट्रेट के0के0 सिंह के समक्ष इन्हे डा० डी० पी० शुक्ल द्वारा दिये गये थे पर आज तक वह संस्था को वापस नही मिल सके। मजबूर होकर श्री अशोक कुमार दुबे की अध्यक्षता के कार्यकाल में पुनः सदस्यता पंजी उन्होने बनवायी. फार्म भरवाया पर उनकी आसामयिक मृत्यु से वह सदस्यता पंजी एवम् कार्य भी उ०प्र० संघ कार्यालय को नही मिल सके। ये सब उनकी टीम के लोग हैं जो दो दो सदस्यता पंजियां रखे हुए हैं, पर संस्था को नहीं दे रहे हैं और सदस्यों के सम्मान की बात करते हैं और झूठे आरोपों की बौछार केवल इसलिए है कि किसी तरह संघ एवम् स्कूल पर कब्जा हो जाये।
पंजी न देने का मुख्य कारण है कि मिलते जुलते नामों को हटाकर अपने हितैषी सदस्यों को
सूची में शामिल करने के आरोप इन पर लगते रहे हैं।
अखिलेश दुबे सदस्यता के लिए घड़ियाली आसूं बहाकर सदस्यों की सहानुभूति पाने का प्रयास निरंतर करते रहे हैं किन्तु हम सबने संवैधानिक तौर पर जो सदस्य हमारे पास पंजीकृत हैं उनमें से जो दिवंगत हो गये हैं उनके द्वारा नामित 26 व्यक्तियों को सदस्यता देने की समस्त प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है जिसमें स्व अखिलेश दुबे के भाई की भी सदस्यता है।
हमारी टीम कथनी पर विश्वास नही करती, करके दिखाती है। पर जरा अखिलेश दुबे अपने
कार्यकाल की एक भी उपलब्धि या इस शहर की किसी अन्य संस्था में वह अपनी उपलब्धि
सदस्यों को बताते तो कितना अच्छा होता ।
मोतीलाल नेहरु पब्लिक स्कूल एक अलग संस्था है उसका प्रबंधन अलग ढंग से होता है। शिक्षकों का वेतन उ0प्र0 संघ का विषय नही है अगर उन्हे इतना भी पता नही है तो बतायें कि कैसे संस्था को आगे बढायेंगे, हम तो निर्णय ले चुके हैं कि अब हमारे जो भी सदस्य हैं वह युवा सदस्यता में बदल रहे हैं। हमारी टीम अपने सभी सदस्यों के 1 बच्चे की पढ़ाई का खर्च उ0प्र0 संघ की कार्यकारिणी उठायेगी। नर्सरी से 12 तक के लिये अपने ही स्कूल में व्यवस्था की जायेगी इसके लिये नियम कानून और शर्तें तय की जायेंगी जिससे सदस्यों के परिवार का शैक्षणिक विकास तेजी से संभव हो पायेगा।
“. आरोप लगाने वालों ने आरोप लगाये लाख मगर सिद्ध कभी कुछ न कर सके, यह गुरुब्रह्म की महिमा है ”
हमारी टीम को अफसोस हो रहा है कि वह भ्रष्टाचार और गबन / बंदरबाट जैसा शब्द प्रयोग करते हैं। हमारी चुनौती है वह आये और हमसे वार्ता करें। टीम परिवर्तन कही नहीं है, जीत हमारी ही होगी. सत्य कभी हारता नही है।
बाइट: विजय कुमार राणा, पुर्व अध्यक्ष, उप संघ, एमएनपीएस जमशेदपुर






