Gwalior: पहली बार रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर जाएंगी प्रियंका, जानिए अब तक क्यों नहीं जाता था गांधी परिवार

ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि इतिहास में गांधी परिवार का कोई सदस्य वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई समाधि स्थल पर पहुंच रहा है। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 21 जुलाई को पहली बार प्रियंका गांधी सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में पहुंच रही हैं और इस दौरे के दौरान सबसे पहले प्रियंका गांधी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर पहुंचकर आशीर्वाद लेकर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि इतिहास में गांधी परिवार का कोई सदस्य वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई समाधि स्थल पर पहुंच रहा है। इससे पहले गांधी परिवार का कोई सदस्य यहां तक नहीं पहुंचा है। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह। आइए जानते हैं…..

ग्वालियर में प्रियंका गांधी का दौरा इस बात को लेकर सुर्खियों में है, क्योंकि गांधी परिवार का पहला कोई सदस्य वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई समाधि पर पहुंच रही हैं। इससे पहले भी जवाहरलाल नेहरू, इंद्रा गांधी, सोनिया गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी ग्वालियर में कई बार आ चुके हैं। इस दौरान उनके कार्यक्रम भी आयोजित हुए हैं, लेकिन गांधी परिवार के सदस्य कभी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर नहीं गए। ऐसा पहली बार होगा जब गांधी परिवार का कोई सदस्य यानी प्रियंका गांधी रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर जा रही हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो गांधी परिवार और सिंधिया परिवार का हमेशा से गहरा नाता रहा है। माना जाता है कि यही वजह है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य अब तक समाधि स्थल पर न नहीं गया।

ऐसा माना है कि 1857 की पहली क्रांति की नायिका रानी लक्ष्मीबाई जब अंग्रेजों से लड़ते हुए ग्वालियर तक पहुंचीं तो उनको उम्मीद थी कि सिंधिया सरकार उनकी मदद करेगी, लेकिन तत्कालीन सिंधिया महाराज और उनका परिवार ग्वालियर किला छोड़कर चला गया और ग्वालियर किले पर कुछ दिनों तक लक्ष्मीबाई और विद्रोहियों का कब्जा जारी रहा, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने फौजी करके हमला बोला जिसमें अंततः रानी लक्ष्मीबाई को अपनी जान का बलिदान देना पड़ा। इसके बाद अंग्रेजों ने ग्वालियर की सरकार उन्हें तत्कालीन सिंधिया शासकों को सौंप दी। उसके बाद से ही सिंधिया परिवार पर यह आरोप लगने लगा कि उन्होंने वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के साथ गद्दारी की है। इसके बाद से ही सिंधिया परिवार ने वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल से दूरी बना ली।

चूंकि सिंधिया परिवार भी कांग्रेस में हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू से लेकर गांधी परिवार का हर सदस्य सिंधिया परिवार के बेहद करीब रहा है। यही कारण है कि जब-जब गांधी परिवार ग्वालियर में आया है तब-तब गांधी परिवार ने भी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल से दूरी बनाई है। भले ही गांधी परिवार के सदस्यों के ग्वालियर में कई कार्यक्रम आयोजित हुए हैं, लेकिन वह आज तक रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर नहीं पहुंचे हैं। सिंधिया परिवार भी कभी भी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई समाधि की दहलीज नही चढ़ा है। वहीं, आज से दो साल पहले तक सिंधिया परिवार का कोई भी सदस्य रानी लक्ष्मीबाई के कार्यक्रम में न तो शामिल होता था और न हीं समाधि पर कभी गया है।यही कारण है कि हमेशा से बीजेपी सिंधिया परिवार को गद्दार बताती आई है और बीजेपी के तमाम बड़े नेता भरे मंच से उन्हें गद्दार शब्द का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन साल 2020 से यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में आने के बाद वह वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर उन्हें नमन करने के लिए पहुंचे, अब तक दो बार समाधि पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर चुके हैं।

बीजेपी में शामिल होने के बाद बिगड़े संबंध
सिंधिया को बीजेपी में शामिल होने के बाद और गांधी परिवार से संबंध पूरी तरह बिगड़ चुके हैं। यही कारण है कि गांधी परिवार सिंधिया परिवार की वजह से आज तक वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर नहीं पहुंचा है, लेकिन अब कांग्रेस और गांधी परिवार की मुखिया सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए समाधि पर पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। यही कारण है कि 21 जुलाई को ग्वालियर में प्रियंका गांधी आ रही हैं और वह सबसे पहले वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर पहुंचेंगी और वहां पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी। इसके साथ ही कोंग्रेस ने बताया है कि प्रियंका गांधी समाधि को नमन करने के बाद मंच से सिंधिया परिवार के इतिहास के बारे में भी जनता को बताएंगी। इसके साथ ही सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी के साथ किस तरह से गद्दारी की है उसको भी जनता के बीच रखेंगी।

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