अभियंताओं से मारपीट के आरोप को विधायक संजीव सरदार और ग्रामीणों ने किया खारिज

अभियंताओं से मारपीट के आरोप को विधायक संजीव सरदार और ग्रामीणों ने किया खारिज

ग्रामसभा की अनुमति के बिना निर्माण कार्य शुरू करने पर उठाए सवाल, रास्ता छोड़ने के नाम पर पैसे लेने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की कही बात

पोटका/जमशेदपुर। सुंदरनगर क्षेत्र के पुड़ीहासा सैनिक कॉलोनी में स्वर्णरेखा नहर प्रमंडल, चांडिल की खरकई दायीं मुख्य नहर की यूजीपीएल योजना के तहत कराए जा रहे बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में पोटका विधायक संजीव सरदार ने अभियंताओं के साथ मारपीट किए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। विधायक के साथ बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने भी मारपीट की घटना से इनकार किया है। विधायक ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ग्रामसभा की अनुमति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना देने और ग्रामीणों के आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को लेकर विभागीय अधिकारियों से सवाल किए।

रास्ता बंद होने की शिकायत पर बुलाई गई बैठक

ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले विधायक संजीव सरदार से शिकायत की थी कि बाउंड्रीवाल निर्माण के कारण वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों से कथित रूप से पैसे लेकर उनके लिए रास्ता छोड़ा जा रहा है, जबकि अन्य परिवारों के आवागमन का रास्ता बंद होने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, इस संबंध में विभाग को पहले भी शिकायत दी गई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

शिकायत मिलने के बाद मंगलवार को विधायक ने अपने कार्यालय में स्वर्णरेखा नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, अन्य संबंधित पदाधिकारियों और ग्रामीणों को बुलाकर दोनों पक्षों की बातें सुनीं।

ग्रामसभा की अनुमति पर विधायक ने मांगा जवाब

बैठक के दौरान विधायक ने अभियंताओं से सवाल किया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ग्रामसभा आयोजित कर ग्रामीणों को योजना की जानकारी दी गई थी या नहीं और उनकी अनुमति ली गई थी या नहीं। विधायक के अनुसार, इस सवाल पर अभियंताओं ने अनुमति नहीं लिए जाने की बात स्वीकार की।

विधायक ने यह भी पूछा कि योजना का शिलान्यास स्थानीय विधायक, सांसद या अन्य संबंधित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया था अथवा उन्हें इसकी सूचना दी गई थी। इस संबंध में भी संतोषजनक प्रक्रिया अपनाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए।

विधायक ने कहा कि विकास योजनाओं को लागू करते समय स्थानीय लोगों को विश्वास में लेना और संबंधित नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी कर किसी भी योजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

सभी प्रभावित परिवारों के लिए रास्ते की व्यवस्था की मांग

रास्ता छोड़ने के बदले कथित रूप से पैसे लिए जाने के आरोपों पर विधायक ने विभागीय अभियंताओं से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के दौरान आवागमन के लिए रास्ता छोड़ा जाना है, तो सभी प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए समान व्यवस्था की जानी चाहिए।

विधायक ने कहा कि स्थानीय परिवारों के लिए रास्ता केवल आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरत है। बीमारी की स्थिति में एंबुलेंस, आपातकाल में दमकल वाहन और बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए रास्ता उपलब्ध होना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्या का उचित समाधान निकालने और निर्माण कार्य में पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया।

आसनबनी मामले का हवाला देकर लगाई फटकार

बैठक के दौरान जवाब से असंतुष्ट विधायक ने अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने आसनबनी में पहले भी ग्रामसभा और स्थानीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाओं को लेकर विवाद उत्पन्न होने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों से विभाग को सबक लेना चाहिए।

विधायक ने स्पष्ट किया कि यदि ग्रामीणों की ओर से रास्ता छोड़ने के नाम पर पैसे मांगने या वसूली किए जाने के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत संबंधित विभाग को देने और आवश्यकता पड़ने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से भी जांच की मांग करने की बात कही।

मारपीट के आरोप पर विधायक की सफाई

विधायक संजीव सरदार ने कहा कि उन्हें अखबार के माध्यम से जानकारी मिली कि अभियंताओं की ओर से उनके खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया गया है। उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी अधिकारी के साथ मारपीट नहीं की। विधायक के मुताबिक, उन्होंने ग्रामीणों की शिकायत पर अधिकारियों से सख्ती से सवाल-जवाब किए और कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी।

बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने भी विधायक के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पूरी बातचीत उनके सामने हुई थी और उनके अनुसार, मारपीट की कोई घटना नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक ने अधिकारियों को केवल डांट-फटकार लगाते हुए नियमों के अनुरूप काम करने और ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने को कहा था।

फिलहाल, इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत, निर्माण कार्य की प्रक्रिया और पैसे लेने के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है, ताकि पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और प्रभावित परिवारों को आवागमन की उचित सुविधा मिल सके।

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