एक्सएलआरआई में ‘फुलक्रम 6.0’ का आयोजन, परामर्श उद्योग के भविष्य पर हुआ मंथन

जमशेदपुर: एक्सएलआरआई–जे वियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में ‘फुलक्रम 6.0’ का सफल आयोजन किया गया। “परामर्श उद्योग में व्यवधान, लचीलापन और रणनीतिक परिवर्तन” विषय पर आधारित इस सम्मेलन का आयोजन पीजीडीएम (जीएम) कार्यक्रम द्वारा किया गया। सम्मेलन में देश की प्रमुख परामर्श कंपनियों के वरिष्ठ विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और छात्रों ने भाग लेकर बदलते कारोबारी परिवेश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और भविष्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन में तीन पैनल चर्चाएं आयोजित हुईं। पहली चर्चा “सूचनाओं की अधिकता के दौर में निर्णय क्षमता” विषय पर केंद्रित रही। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक तकनीक और डेटा विश्लेषण के बावजूद सही निर्णय लेने के लिए अनुभव, व्यावहारिक समझ और विवेक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। उनका मानना था कि केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्य अनुभव के आधार पर ही प्रभावी निर्णय लिए जा सकते हैं।
दूसरे सत्र में जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई परामर्श उद्योग के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का द्वार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में वही संस्थान सफल होंगे, जो मानवीय विशेषज्ञता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित कर सकेंगे। नवाचार, सहानुभूति और ग्राहकों की जरूरतों की बेहतर समझ को सफलता का आधार बताया गया।
तीसरे और अंतिम सत्र में एआई के दौर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, शुल्क निर्धारण, सेवाओं के एकरूपीकरण और परामर्श कंपनियों के लाभ को बनाए रखने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि ग्राहकों का विश्वास, विशेषज्ञता और जटिल परिस्थितियों में मानवीय निर्णय क्षमता ही परामर्श उद्योग की सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी।
कार्यक्रम का मार्गदर्शन प्रो. कनगराज अय्यालुसामी, प्रो. सुनील सारंगी और कॉर्पोरेट रिलेशंस एवं प्लेसमेंट विभाग के उपाध्यक्ष राजनी रंजन ने किया। आयोजन में कौटिल्य कंसल्टिंग क्लब के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों ने कहा कि फुलक्रम 6.0 ने उद्योग, शिक्षा और तकनीक के बीच सार्थक संवाद का मंच उपलब्ध कराया तथा परामर्श उद्योग के भविष्य को नई दिशा देने वाले विचारों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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