केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मंच से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत करार दिया। दूसरी ओर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष और जनदबाव का परिणाम बताया।
सीजेपी ने जंतर-मंतर पर धरना खत्म करने का ऐलान किया
कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने सरकार के साथ अपनी तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद यह ऐलान किया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिलते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने खुशी जाहिर की। मंच से अभिजीत दीपके ने कहा कि लंबे समय से चल रहा आंदोलन अपना पहला बड़ा लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोगों का कहना था कि इस्तीफा नहीं होगा, लेकिन अब यह हो चुका है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं और जब तक उन पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
आंदोलन की दो प्रमुख मांगों पर अड़े प्रदर्शनकारी
सीजेपी की ओर से कहा गया कि जिन छात्रों ने कथित तौर पर परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या की, उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए। आंदोलनकारियों की मांग है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मंच से यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए और प्रदर्शनकारियों की शेष मांगों पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।
सोनम वांगचुक ने कहा- यह लोकतंत्र की जीत
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने शांतिपूर्ण जनआंदोलन और छात्रों की एकजुटता को लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत बताया। उनके बयान के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों ने भी इसका स्वागत किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष की प्रतिक्रियाएं
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। आम आदमी पार्टी ने कहा कि यह देश के युवाओं और छात्रों की जीत है तथा लगातार बने जनदबाव के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और संबंधित मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा भी आवश्यक है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही से हमेशा बचा नहीं जा सकता। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों के शांतिपूर्ण आंदोलन को इस बदलाव का प्रमुख कारण बताया।
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि यह छात्रों, युवाओं और विपक्ष की एकजुटता की जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाएगी।
पी. चिदंबरम और अरविंद केजरीवाल ने भी किया स्वागत
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और पूरे देश को बधाई दी। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मौजूदा विवाद के बीच महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मूल मुद्दों पर संसद और सार्वजनिक स्तर पर गंभीर चर्चा का मार्ग प्रशस्त होगा।




