यह लड़ाई सिर्फ सरकार, पत्रकार और प्रशासन की नहीं, समाज के प्रबुद्ध लोगों को भी आगे आना होगा ।।

यह लड़ाई सिर्फ सरकार, पत्रकार और प्रशासन की नहीं, समाज के प्रबुद्ध लोगों को भी आगे आना होगा ।।

चतरा जिले में बेटियों का घटता अनुपात, समाज और सिस्टम दोनों के लिए चेतावनी ।।

भ्रूण परीक्षण के बाद गर्भपात बन रहा सबसे बड़ा कारण ।।

चतरा(संजीत मिश्रा)। देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस बढ़ती भीड़ में बेटियों की आवाज़ धीरे-धीरे दबती जा रही है। चतरा जिला भी इस पीड़ा से अछूता नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर 1000 की जनसंख्या में मात्र 892 लड़कियों का जन्म होना अपने आप में एक गंभीर और भयावह संकेत है। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि समाज के चेहरे पर पड़ा एक गहरा दाग है। हम सब बातें तो बहुत करते हैं “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी कोख में ही बेटियों का भविष्य तय कर दिया जा रहा है। यह हालात साफ बताते हैं कि बेटा-बेटी का भेद अब भी खत्म नहीं हुआ है और सरकारी प्रयास ज़मीन पर पूरी तरह असरदार नहीं हो पा रहे हैं। कहा जाता है कि बेटियों का जन्म सौभाग्य लेकर आता है। बेटियां प्रेम, करुणा, समर्पण और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं। हमारे धर्म, संस्कृति और पुराणों में बेटियों को देवी का स्वरूप माना गया है। लेकिन कलयुग की इस अंधी दौड़ में, लगता है बेटियों का वह स्थान कहीं खो सा गया है। हर वह व्यक्ति जो सच और गलत में फर्क समझता है, उसकी चुप्पी भी अपराध में भागीदारी बन जाती है। कोख में बेटियों की हत्या केवल कानून से नहीं रुकेगी, इसके लिए सोच बदलनी होगी, मानसिकता बदलनी होगी। समाज को यह स्वीकार करना होगा कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है।

आज समाज में बेटियों के साथ अन्याय, अत्याचार और क्रूरता की खबरें इतनी आम हो गई हैं कि मानवता खुद शर्मिंदा नजर आती है। हाल ही में कठौतिया तालाब के समीप एक नाले में नवजात बच्ची का शव मिलना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। उस नन्ही सी देह को देखकर हर संवेदनशील आंख नम हो गई। इस अमानवीय कृत्य ने न सिर्फ एक मां को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि पूरे समाज को आईना दिखा दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है, और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। इसी क्रम में प्रतापपुर प्रखंड में बिना वैध दस्तावेज के संचालित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया। इस पूरे मामले में अनुमंडल पदाधिकारी जहूर आलम ने अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड और नर्सिंग होम के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो एक सकारात्मक और आवश्यक कदम माना जा रहा है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि जब तक पीसीपीएनडीटी एक्ट पूरी मजबूती से लागू नहीं होगा, तब तक भ्रूण जांच जैसे अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है। शहर से लेकर प्रखंडों तक, संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो चोरी-छिपे भ्रूण जांच का धंधा चला रहे हैं और कई बार स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगती। अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ अफसोस न करें, बल्कि जिम्मेदारी लें। बेटियों के अस्तित्व को बचाना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना, उन्हें शिक्षा और हर क्षेत्र में बराबरी का अवसर देना यह सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। क्योंकि अगर आज भी हमने आंखें मूंदे रखीं, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे यही पूछेंगी “जब बेटियां मिटाई जा रही थीं, तब आप क्या कर रहे थे?”

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