विकसित भारत @ 2047 की दिशा में शिक्षा की भूमिका पर रंभा कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
पोटका : रंभा कॉलेज ऑफ़ एजूकेशन द्वारा मंगलवार को “विकसित भारत @ 2047 हेतु समर्थ शिक्षक, संवेदनशील शिक्षार्थी और समृद्ध समुदाय की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं समाज की भूमिका पर गंभीर विमर्श करना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी, महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी बिहार के डॉ. प्रसून दत्त सिंह तथा पश्चिम बंगाल के गोपाल चंद्र मेमोरियल कॉलेज ऑफ़ एजूकेशन की डॉ श्रेयसी पालटा सिंह उपस्थित रहीं। साथ ही एलबीएसएम के प्राचार्य डॉ अशोक कुमार अविचल, प्रोफेसर डॉ दीपांजय श्रीवास्तव एवं शिक्षाविद दिलीप मंगराज की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि बौद्धिक उन्नति के लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के समक्ष समस्याएं और चुनौतियां रखनी चाहिए, जिससे उनमें समाधान खोजने की क्षमता विकसित हो। डॉ. प्रसून दत्त सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सही अनुपालन को विकसित भारत के सपने की कुंजी बताते हुए शुचिता, सहभागिता और भारतबोध पर बल दिया। वहीं डॉ श्रेयसी पालटा सिंह ने पीपीटी के माध्यम से समानता एवं समावेशी शिक्षा को समग्र शिक्षा का आधार बताया।
संगोष्ठी की मुख्य संरक्षिका कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता एवं संरक्षक रजिस्ट्रार डॉ. रंजीत कर्ण रहे, जबकि कन्वेनर की भूमिका डॉ संजीव आनंद ने निभाई। इस अवसर पर आईएसबीएन युक्त शैक्षणिक पुस्तक “मानवतावादी और समग्र शिक्षा के लिए आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता”, संगोष्ठी सोवेनियर तथा नववर्ष डेस्क कैलेंडर का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में ऑफलाइन व ऑनलाइन कुल 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सफल आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षकों, आयोजक समिति एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वाइट : डॉ कल्याणी





