दिल्ली /दिनांक- 02/11/2025 को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी के 12 प्रतिनिधि मंडलों ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी से मिल कर जनजातीय “हो” भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर मांग पत्र सौंपा, इससे पूर्व 2023 में भी इस विषय को लेकर राष्ट्रपति जी से मिल कर माँग पत्र सौंपा गया था l राष्ट्रपति जी से हो भाषा की मान्यता के विषय में बहुत ही सकारात्मक बात हुई उन्होंने प्रतिनिधि मंडलों के साथ हो भाषा में ही वार्तालाप किये l
राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुन्दुईया ने ने बताया की देश भर में 50 लाख से ज़्यादा लोग अपने रोज़मर्रा के संचार में हो भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
जनजातीय “हो” भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए लगातार कई वर्षों से राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से अनुरोध किया गया है। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने “हो” भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया है और झारखंड सरकार तथा ओडिशा सरकार ने भी इस संबंध में अनुशंसा पत्र पूर्व में भारत सरकार को भेज चुकी हैं और झारखण्ड राज्य में द्वितीय राज्यभाषा की भी मान्यता है।
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुरा बिरुली ने कहा की यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी जनजातीय आबादी अपनी मातृभाषा की रक्षा और संरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित है, जबकि कम बोलने वाली आबादी और सीमित साहित्य विकास वाली कई भाषाओं को पहले ही आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि संवैधानिक मान्यता हो भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में मदद करेगी, जिससे भारत की भाषाई विविधता और जनजातीय विरासत मजबूत होगी। हमें उम्मीद है कि जनजातीय हो भाषा को जल्द ही भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में अपना उचित स्थान मिलेगा।
12 प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुन्दुईया, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुरा बिरुली, बाजू चंद्र सिरका, गिरीश चंद्र हेम्ब्रोम, शान्ति सिदु, बसंत बुडीउली, फूलमती सिरका, जगारनाथ केराई, खिरोद हेम्ब्रोम,गोपी लागुरी,गोमिया ओमंग, निकिता बिरुली आदि थे l
सुरा बिरुली (9931333025)
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी






