जमशेदपुर, 19 सितंबर 2025 को आदिवासी हो समाज युवा महासभा, ग्रामसभा जसकानडी की ओर से ओत गुरु लाको बोदरा जी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन ने विधि विधान के साथ किया कार्यक्रम का मंच संचालन सुरा बिरुली, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने किया ।
ओत गुरु लाको बोदरा जी को हो भाषा वारंग क्षिति लिपि के जनक के रूप में जाना जाता है, और उनका योगदान आदिवासी हो समाज के लिए अतुलनीय है। वारंग क्षिति लिपि ने हो भाषा को एक नई दिशा दी और इसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर श्री चंपई सोरेन ने कहा कि भाषा और संस्कृति हमारी पहचान हैं, और इन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि ओत गुरु लाको बोदरा जी का योगदान हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा और हमें उनकी विरासत को सहेजने के लिए काम करना चाहिए,हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करवा के रहेंगे, इस वर्ष भी दोलाबु दिल्ली 5.0 जाने के लिए हर संभव मदद करेंगे ।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और समाज के सदस्यों ने ओत गुरु लाको बोदरा जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर हो भाषा के विकास और प्रसार पर भी चर्चा की गई और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्प लिया गया।
*कार्यक्रम के मुख्य रूप विशिष्ट अतिथि
कुसुम पुरती जिला परिषद्, संजू भूमिज -मुखिया
राम चन्द्र तियु,हातु मुंडा,सुमन सिरका-मुखिया
सुखलाल हेम्ब्रोम- प्रधान,नीरज सिंह सरदार -मुखिया, विशवजीत भगत -पूर्व समिति.
आदिवासी हो समाज युवा महासभा, ग्रामसभा जसकानडी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से ओत गुरु लाको बोदरा जी के योगदान को सम्मानित करने और हो भाषा को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हमें उम्मीद है कि यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और हो भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुली, गंगाराम बानरा, शिव हांसदा, चैतन्य पुरती, मोचीराम मार्डी, बेतो कुंकल, सकरु कुंकल, हकाल मुर्मू, मोना देवगम, मोती लाल सामाड, साधु सामड, रतन सामड, मोसो सोय, कन्हाई हेम्ब्रोम, सोनाराम अल्डा, संदीप सामड, अजय सामड, राजू सामड आदि उपस्थित.





