मतदान समाप्ति के 48 घंटे पहले चुनावी प्रचार-प्रसार पर रहेगी रोक, नियम तोड़ने पर दण्ड का प्रावधान
चुनाव आयोग के दिशा निर्देशानुसार जिला के बाहर के राजनीतिक व्यक्ति/कार्यकर्ता को 23 मई, अपराह्न 05:00 बजे के बाद जिला से बाहर जाना होगा
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 में उल्लेखित प्रावधान के अनुसार-
1. कोई भी व्यक्ति, किसी मतदान क्षेत्र में, उस मतदान क्षेत्र में निर्वाचन के लिए मतदान की समाप्ति के लिए नियत किए गए समय के साथ समाप्त होने वाले अड़तालीस घंटों की कालावधि के दौरान-
(क) निर्वाचन के संबंध में कोई सार्वजनिक सभा या जुलूस न बुलाएगा, न आयोजित करेगा , न उसमें उपस्थित होगा, न उसमे सम्मिलित होगा और न उसे संबोधित करेगा, या
(ख) चलचित्र, टेलीविजन या वैसे की अन्य साधित्रों द्वारा जनता के समक्ष किसी निर्वाचन संबंधी बात का संप्रदर्शन नहीं करेगा; या
(ग) कोई संगीत समारोह या कोई नाट्य अभिनय या कोई अन्य मनोरंजन या आमोद-प्रमोद जनता को उसके प्रति आकर्षित करने की दृष्टि से, आयोजित करके या उसके आयोजन की व्यवस्था करके, जनता के समक्ष किसी निर्वाचन संबंधी बात का प्रचार नहीं करेगा।
(2) वह व्यक्ति, जो उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा।
भारत चुनाव आयोग के दिशा निर्देशानुसार वैसे राजनीतिक व्यक्ति/कार्यकर्ता जो बाहर से चुनाव प्रचार के लिए आये हैं, तथा इस जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र/09-जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के मतदाता या अभ्यर्थी नहीं है उन्हें दिनांक-23.05.2024 को अपराह्न 05:00 बजे के पश्चात निर्वाचन क्षेत्र से बाहर चले जाना है। उक्त अवधि के बाद प्रचार करते हुए पाए जाने या 09-लोकसभा क्षेत्र के बाहर के राजनीतिक व्यक्ति/कार्यकर्ताओं के सम्बन्धित विधान सभा क्षेत्र में मौजूद पाए जाने पर, सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी ।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश में उल्लेखित है कि-प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद निर्वाचन क्षेत्र के भीतर कोई भी प्रचार नहीं हो सकेगा, ऐसे राजनीतिक पदाधिकारियों/पार्टी कार्यकर्ताओं/जुलूस पदाधिकारियों/अभियान पदाधिकारियों आदि की उपस्थिति नहीं होनी चाहिए, जो निर्वाचन क्षेत्र के बाहर से लाये गये हैं और जो निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। निर्वाचन क्षेत्र में मौजूद रहना जारी रखें क्योंकि अभियान समाप्त होने के बाद भी उनकी निरंतर उपस्थिति स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के माहौल को कमजोर कर सकती है।





