Chandil : लोकसभा चुनाव को लेकर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में सरगर्मी तेज हो गई है. चौक-चौराहों से लेकर गांव के चौपाल और चाय की दुकानों में सुबह से शाम तक बस लोकसभा चुनाव को लेकर ही चर्चा चल रही है. कोई किसी को चुनाव में सबक सिखाने की बात कर रहा है तो कोई दोबारा लाने की बात कर रहा है. चुनाव की सबसे अधिक सरगर्मी ग्रामांचलों में देखने को मिल रहा है. गांवों के चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों में जमा होने वाले लोगों के बीच भी बस चुनाव की ही बातें हो रही है. मतदाताओं की भी अपनी-अपनी बात है, अपना तर्क है. कुछ पक्ष में तो कुछ विपक्ष की बाते कर रहे हैं. जहां भी चार-पांच लोग एकत्रित हो रहे हैं, वहीं राजनीति की ही बात हो रही है. लोग ऐसे चर्चा के माध्यम से अपनी परेशानी का समाधान की भी तलाश कर रहे हैं.
प्रत्याशियों की हो रही तुलनात्मक चर्चा जनता भी इस बदलते हालात को समझते हुए आगे की रणनीति बना रही है. वहीं आम लोग कयास लगा रहे हैं कि इस बार जीत किसकी होगी. किसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा और कौन सांसद बनेगा? इस तरह की चर्चाएं चौराहों के साथ ही महिला मंडल और आमजन की जुबान पर है. जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, चर्चा का बाजार भी गर्म होता जा रहा है. मैदान में उतरे प्रत्याशियों की तुलनात्मक चर्चा जोर-शोर से हर क्षेत्र में हो रही है. इस प्रकार की चर्चा से कई मतदाता प्रभावित भी होते हैं. ऐसे में इस प्रकार की चर्चाएं प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला बदल देती हैं. कई बार तो प्रत्याशी भी अपने समर्थकों को चुनावी गणित का आंकलन करने के लिए इन चर्चाओं में शामिल करते हैं. चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.
घर-घर दौड़ लगा रहे उम्मीदवार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जहां मतदाताओं का जब्ज टटोल रहे हैं, वहीं मतदाता भी उम्मीदवारों की जांच-परख कर रहे हैं. वर्तमान सांसद के कार्यो की आकलन करने के साथ अन्य उम्मीदवार का रिकार्ड भी जांच रहे हैं. पुराने सांसद जहां अपनी सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यो की जानकारी देते हुए अपनी कुर्सी बचाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. वहीं कुछ नए उम्मीदवार पुराने जनप्रतिनिधि की नाकामयाबी को हवाला देकर मतदाताओं को सतर्क करने के साथ उन्हेें अपने पाले में करने की जुगत भिड़ा रहे हैं. साथ ही उन्हें मौका मिलने पर बेहतर काम करने की बात कह रहे हैं. लोगों से दूर रहने वाले अब घर-घर दौड़ लगा रहे हैं. किसी की नहीं सुनने वाले अब लोगों के समक्ष हाथ जोड़ रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी लोगों को कई तरह के सपने दिखा रहे हैं, लेकिन मतदाता अपना पत्ता नहीं खोल रहे हैं.





