आनंद मार्ग का गोल पहाड़ी में नेत्र जांच शिविर ,गदरा में फलदार पौधे का वितरण एवं आदित्यपुर में तीन घंटे का “बाबा नाम केवलम”अखंड कीर्तन

आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गोल पहाड़ी एसजीबी कंपनी के पास पूर्णिमा नेत्रालय के सहयोग से मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए जांच शिविर में लगभग 80 लोगों ने अपने आंखों का जांच कराया एवं 20 लोग मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चयनित हुए जिनका ऑपरेशन 27 दिसंबर को पूर्णिमा नेत्रालय में कर लेंस लगाया जाएगा गदरा आनंद मार्ग जागृति में लगभग 50 फलदार पौधे आम ,कटहल ,अमरुद ,जामुन एवं अनार का वितरण किया गया एवं माझी टोला रैन बसेरा आदित्यपुर में दो स्थान पर 1 प्रहर (3 घंटे )का “बाबा नाम केवलम” अखंड कीर्तन किया गया

कीर्तन समाप्ति के बाद आनंद मार्ग के लालबिहारी आनंद ने कहा कि कीर्तन का मतलब हुआ जोर-जोर से किसी का गुणगान करना या प्रशंसा करना ऐसे जोर से बोला जाए जो कि अन्य किसी दूसरे के कान में भी जाए “हरि “का कीर्तन जो”हरि “हैं अर्थात परम पुरुष हैं इन्हीं का कीर्तन करना है अपना कीर्तन नहीं कीर्तनिया सदा “हरि ” मनुष्य यदि मुंह से स्पष्ट भाषा में उच्चारण कर कीर्तन करता है उससे उसका मुख पवित्र होता है जीहां पवित्र होती है कान पवित्र होते हैं शरीर पवित्र होता है और इन सब के पवित्र होने के फलस्वरूप आत्मा भी पवित्र होती है कीर्तन के फल स्वरुप मनुष्य इतना पवित्र हो जाता है कि वह अनुभव करता है जैसे उसने कभी अभी-अभी गंगा स्नान किया हो भक्तों के लिए गंगा स्नान का अर्थ हुआ सदा कीर्तन यदि लोग मिल जुलकर कीर्तन करते हैं तब उन लोगों की मात्र शारीरिक शक्ति ही एकत्रित होती है ऐसी बात नहीं है उनकी मिलित मानस शक्ति भी एक ही भावधारा में एक ही परम पुरुष से प्रेरणा प्राप्त कर एक ही धारा में एक ही गति में बहती रहती है इसलिए मिलित जड़ शक्ति और मिलित मानसिक शक्ति इस पंचभौतिक जगत का दुख कलेश दूर करती है.

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